केरल में साल भर धान की खेती के साथ मत्स्य पालन के लिए वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता : ठाकुर

केरल में साल भर धान की खेती के साथ मत्स्य पालन के लिए वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता : ठाकुर

केरल में साल भर धान की खेती के साथ मत्स्य पालन के लिए वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता : ठाकुर
Modified Date: January 6, 2026 / 05:50 pm IST
Published Date: January 6, 2026 5:50 pm IST

कोच्चि, छह जनवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री राम नाथ ठाकुर ने मंगलवार को यहां पोक्काली खेतों में सालभर संयुक्त रूप से धान की खेती और मत्स्य पालन की क्षमता एवं संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया।

पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए किसानों की आय बढ़ाने की जरूरत पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि पोक्काली के खेतों की पूरी क्षमता का उपयोग सतत तरीके से किया जाना चाहिए।

पोक्काली, खारे पानी में उगने वाली धान की एक किस्म है और राज्य के जलभराव वाले तटीय क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है।

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ठाकुर सोमवार को नायरंबलम की अपनी यात्रा के दौरान पोक्काली खेतों में मौजूदा मौसमी नियमों का पालन करने के बजाय साल भर मत्स्य पालन की अनुमति देने की मांग कर रहे किसानों से बात कर रहे थे।

आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, मंत्री ने कहा, ‘‘किसी भी निर्णय से पहले प्रचलित कानूनों, पर्यावरणीय प्रभावों और दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का व्यापक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।’’

वर्तमान में पानी में कम खारेपन के दौरान जून से अक्टूबर तक पोक्काली के खेतों में धान की खेती की अनुमति है, जबकि नवंबर से अप्रैल तक पानी में खारेपन का स्तर अधिक होने के दौरान मछली पालन की अनुमति रहती है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने कहा कि नीतिगत निर्णय लेने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि मौजूदा सीजन के बाद मछली पालन में वृद्धि से क्या संभावनाएं उत्पन्न होंगी और इस सबके क्या नतीजे होंगे।

भाषा

यासिर पवनेश

पवनेश


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