अलगावादी नेता की मौजूदगी में भीड़ की अलगाव वाली नारेबाजी गैरकानूनी गतिविधि: अदालत
अलगावादी नेता की मौजूदगी में भीड़ की अलगाव वाली नारेबाजी गैरकानूनी गतिविधि: अदालत
श्रीनगर, नौ सितंबर (भाषा) जम्मू कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने यूएपीए के एक मामले में एक आरोपी को आरोपमुक्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि किसी प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन के प्रमुख की मौजूदगी में भीड़ द्वारा अलगाववादी नारे लगाना, पहली नजर में गैर-कानूनी गतिविधि की परिभाषा में आता है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कुपवाड़ा के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश (एनआईए अधिनियम के तहत विशेष अदालत) द्वारा 2013 के यूएपीए के एक मामले में मोहम्मद यूसुफ लोन को आरोपमुक्त करने के आदेश को रद्द कर दिया।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘एक प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन के प्रमुख के साथ भीड़ का नेतृत्व करते हुए आरोपी द्वारा अलगाव के लिए नारे लगाना, साथ ही जनता को भड़काना और सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा करना, पहली नजर में इस परिभाषा के दायरे में पूरी तरह से आता है।’’
मामले के अनुसार, 8 नवंबर 2013 को कुपवाड़ा की जामिया मस्जिद से मोहम्मद यूसुफ लोन और प्रतिबंधित हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष दिवंगत सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व में एक भीड़ निकली। इस भीड़ ने भारत सरकार के खिलाफ देश-विरोधी नारे लगाए और पुलिस तथा सुरक्षा बलों पर पथराव किया।
आरोपपत्र के अनुसार, अलगाववादी नेताओं ने कथित तौर पर भारत संघ की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ आम जनता को भी उकसाया।
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा

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