आंशिक न्यायालय कार्यदिवसों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं को दलीलें रखने की अनुमति नहीं होगी: उच्चतम न्यायालय

आंशिक न्यायालय कार्यदिवसों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं को दलीलें रखने की अनुमति नहीं होगी: उच्चतम न्यायालय

आंशिक न्यायालय कार्यदिवसों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं को दलीलें रखने की अनुमति नहीं होगी: उच्चतम न्यायालय
Modified Date: June 1, 2026 / 02:07 pm IST
Published Date: June 1, 2026 2:07 pm IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह वरिष्ठ अधिवक्ताओं को आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों में न तो मामलों को तत्काल सूचीबद्ध कराने के लिए उल्लेख करने देगा और न ही सूचीबद्ध मामलों में दलीलें रखने की अनुमति देगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह कदम सोमवार से 12 जुलाई तक आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान युवा वकीलों को अपने मामलों में दलीलें रखने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

शीर्ष अदालत में ग्रीष्मावकाश को अब आंशिक न्यायालय कार्य दिवस कहा जाता है। इस साल इस अवधि के दौरान प्रत्येक सप्ताह तीन से चार पीठ सुनवाई करेंगी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने सुनवाई शुरू होते ही कहा, ‘‘मेरी अदालत में किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को अनुमति नहीं दी जाएगी।’’ उन्होंने न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की सदस्यता वाली पीठ की अगुवाई करते हुए यह कहा।

जब एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने एक मामले का उल्लेख करने की कोशिश की तो न्यायमूर्ति नाथ ने कहा कि वह आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान अपनी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध मामलों में वरिष्ठ वकीलों को न तो मामले का उल्लेख करने देंगे और न ही दलीलें रखने की अनुमति देंगे।

न्यायमूर्ति नाथ ने कहा कि वह इस अवधि के दौरान केवल युवा वकीलों और ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ को अपनी पीठ के समक्ष दलीलें रखने की अनुमति देंगे।

जब एक वरिष्ठ वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि उन्हें मामले में आज दलीलें रखने की अनुमति दी जाए क्योंकि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी तो न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, ‘‘आप ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ या निर्देश देने वाले वकील को बुलाइए। हम उन्हें सुनेंगे लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नहीं।’’

हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हो रहे हैं, उन्हें खारिज नहीं किया जाएगा और उन्हें शीर्ष अदालत के सामान्य कार्यदिवस फिर शुरू होने के बाद जुलाई में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की एक अन्य पीठ ने भी कहा कि आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं को मामलों का उल्लेख करने या दलीलें रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने अदालत कक्ष में मौजूद वकीलों से कहा, ‘‘हम आज के लिए ही इसकी अनुमति दे रहे हैं लेकिन कल से वरिष्ठ अधिवक्ताओं को दलीलें रखने या मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कनिष्ठ अधिवक्ता मामलों में दलीलें रखते हैं तो नोटिस जारी होने की संभावना अधिक है और यदि वरिष्ठ अधिवक्ता दलीलें रखते हैं तो मामला खारिज होने की संभावना अधिक है।’’

न्यायमूर्ति संजय करोल ने भी इसी तरह की टिप्पणी की। उन्होंने न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की सदस्यता वाली पीठ की अध्यक्षता करते हुए अपनी बात रखी।

भाषा

सिम्मी मनीषा

मनीषा


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