चेन्नई, 18 सितंबर (भाषा) ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामले की जारी जांच में ऐसी कई पीड़िताओं की पहचान हुई है जिनके साथ पिछले कई वर्षों के दौरान उसने कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पीड़िताओं के बयान यहां एक अदालत के समक्ष दर्ज किए गए और कथित घटनाओं के समय उनमें से कई नाबालिग थीं।
जांच में पता चला कि पीड़िताएं आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आती हैं और उनमें से कुछ गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों से हैं। आरोप है कि उनका कई वर्षों तक यौन उत्पीड़न किया गया।
हालिया जांच में एक पीड़िता के अनुसूचित जाति समुदाय से होने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी हैं।
पुलिस ने बताया कि इस पीड़िता को अधिनियम के प्रावधानों के तहत वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इस बीच, यहां की एक अदालत ने यौन उत्पीड़न मामले में ‘जेम ग्रुप’ के अध्यक्ष वीरमणि को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
वीरमणि की उम्र 80 वर्ष से अधिक है और पॉक्सो मामले में गिरफ्तारी के बाद से उसे यहां पुझल केंद्रीय कारागार में रखा गया था।
उसकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए पॉक्सो अदालत ने जांच अधिकारियों को उससे जेल परिसर में ही पूछताछ करने का निर्देश दिया।
अदालत ने हिरासत की अवधि के दौरान वीरमणि को अपने वकील से प्रतिदिन मिलने की अनुमति भी दी।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या अन्य किसी नाबालिग का भी यौन उत्पीड़न किया गया।
वीरमणि को पिछले महीने उसके दो सहयोगियों शांति (60) और उसके पति महेंद्र सिम्हन (63) के साथ गिरफ्तार किया गया था। यह मामला 2019 में एक नाबालिग लड़की के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है।
तीनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
पुलिस ने बताया कि यह मामला अक्टूबर 2025 में उस समय दर्ज किया गया था जब जांच दल को एक वीडियो क्लिप मिली थी जिसमें कथित तौर पर वीरमणि एक नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न करता दिखाई दे रहा था।
भाषा
सिम्मी वैभव
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