शिमला नगर निगम का बजट : भाजपा ने महापौर के पद पर बने रहने पर नाराजगी जताई
शिमला नगर निगम का बजट : भाजपा ने महापौर के पद पर बने रहने पर नाराजगी जताई
शिमला, 20 फरवरी (भाषा) शिमला नगर निगम के बजट सत्र की शुरूआत हंगामेदार रही और शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षदों ने सदन से बहिर्गमन किया।
सत्र के पहले दिन महापौर ने जैसे ही अपना बजट भाषण शुरू किया, भाजपा पार्षदों ने उन्हें बीच में ही रोककर उनके पद पर बने रहने को लेकर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि सरकार की ओर से उनके कार्यकाल विस्तार के संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
वर्ष 2025 में, राज्य सरकार ने शिमला नगर निगम के महापौर और उप महापौर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल करने का निर्णय लिया। इससे पहले, इन पदों पर नियुक्तियां आरक्षण ‘रोस्टर’ के अनुसार की जाती थीं।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने 16 फरवरी, 2026 को इस विस्तार को औपचारिक रूप देने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश नगर निगम संशोधन विधेयक को पुनः पारित किया।
इस विधेयक ने उस अध्यादेश का स्थान लिया जिसे विधानसभा ने दिसंबर 2025 में पारित किया था और राज्यपाल ने पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया था। लेकिन विधानसभा ने इसे मूल स्वरूप में ही पुनः पारित कर दिया।
महापौर के भाषण के दौरान, भाजपा पार्षदों ने बजट को अमान्य करार देते हुए तर्क दिया कि महापौर को अपने कार्यकाल विस्तार संबंधी आधिकारिक अधिसूचना के अभाव में इसे प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने नैतिकता के आधार पर उनके इस्तीफे की मांग की।
भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने संवाददाताओं से कहा, ‘रोस्टर के अनुसार, नगर निगम की महापौर एक महिला होनी चाहिए थी। हालांकि, सुरिंदर चौहान अब भी इस पद पर बने हुए हैं जबकि राज्य सरकार द्वारा उनके कार्यकाल विस्तार के संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।’
उन्होंने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि निगम पहले से ही कर्ज में डूबा हुआ है और उसके पास राजस्व के स्रोत नहीं हैं।
उन्होंने इस तरह का बजट पेश करने के उद्देश्य पर सवाल उठाया।
भाषा
राखी अविनाश
अविनाश
अविनाश

Facebook


