शिवसेना (उबाठा) के सांसदों ने सभी पहलुओं पर विचार कर पाला बदला : एकनाथ शिंदे

शिवसेना (उबाठा) के सांसदों ने सभी पहलुओं पर विचार कर पाला बदला : एकनाथ शिंदे

शिवसेना (उबाठा) के सांसदों ने सभी पहलुओं पर विचार कर पाला बदला : एकनाथ शिंदे
Modified Date: July 15, 2026 / 06:42 pm IST
Published Date: July 15, 2026 6:42 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को कहा कि शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों को उनकी पार्टी में शामिल करने की प्रक्रिया सभी पहलुओं पर विचार करने और कानूनी कसौटी पर परखने के बाद की गई। उन्होंने भरोसा जताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उनके पक्ष में फैसला सुनाएंगे।

उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (उबाठा) के छह सांसद पिछले महीने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए, जिससे लोकसभा में उनके सदस्यों की संख्या 13 हो गई। शिंदे गुट का कहना है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की शर्त पूरी होती है।

शिंदे ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ये छह सांसद दो-तिहाई बहुमत के साथ हमारे साथ आए हैं। कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद, उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और जरूरी दस्तावेज़ व वीडियो रिकॉर्डिंग जमा करने सहित सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में बहुमत मायने रखता है। इन छह सांसदों के हमारे साथ आने से शिवसेना को बहुमत मिल गया है। हमने सब कुछ संसदीय और विधायी प्रक्रियाओं के तहत किया है।’’

उधर, शिवसेना (उबाठा) नेताओं ने दावा किया है कि कि पार्टी में हुई टूट के लिए पूरे संगठनात्मक ढांचे की दो-तिहाई संख्याबल की कानूनी जरूरत पूरी नहीं हुई है। इस बारे में पूछे जाने पर शिंदे ने कहा कि इस मामले पर लोकसभा अध्यक्ष फैसला लेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘पूरी प्रक्रिया लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष पूरी की गई है। हम जो भी करते हैं, उसे एकदम पुख्ता और सटीक तरीके से करते हैं। आपने पहले भी ऐसा देखा है।’’

शिंदे से संवाददाताओं ने सवाल किया कि क्या 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र से पहले बिरला विलय को मंज़ूरी देंगे? इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कोई शक नहीं है कि फ़ैसला लिया जाएगा, क्योंकि सभी संवैधानिक और कानूनी ज़रूरतों को पूरा कर लिया गया है। लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय ने अलग हुए गुट को मंज़ूरी देने के बारे में अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई फैसला नहीं सुनाया है।’’

शिंदे ने उन खबरों का भी स्वागत किया कि शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शप) महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े नए संविधानिक संशोधन विधेयकों की समीक्षा करने के बाद उनका समर्थन कर सकती है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर वे इनका समर्थन करते हैं, तो यह अच्छी बात है और हम इसका स्वागत करते हैं।’’ उन्होंने कहा कि राकांपा (शप) को शायद यह एहसास हो गया होगा कि इन विधेयकों का विरोध करने पर पार्टी का हाल भी ‘‘तृणमूल कांग्रेस जैसा’’ हो सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक पारित होने चाहिए। परिसीमन इसलिए जरूरी है क्योंकि कुछ चुनाव क्षेत्रों में 20 लाख, 25 लाख और यहां तक कि 30 लाख तक मतदाता हैं। इतने लोगों तक एक प्रतिनिधि कैसे ठीक से पहुंच सकता है? मैं पूरे भरोसे के साथ कहता हूं कि ये दोनों विधेयक पारित हो जाएंगे।’’

राकांपा (शप) नेता सुप्रिया सुले ने हालांकि उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि पार्टी परिसीमन विधेयक का समर्थन करने की इच्छुक है। उन्होंने कहा कि पार्टी विपक्षी ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) गठबंधन के घटकों के साथ चर्चा करने के बाद इन विधेयकों को लेकर अपने आधिकारिक रुख की घोषणा करेगी।

भाषा धीरज वैभव

वैभव


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