शिवाजी, बस्तर के राजा और अन्य शासक संघर्षों के दौरान देवी प्रदत्त तलवारों से लड़े: एनसीईआरटी किताब

शिवाजी, बस्तर के राजा और अन्य शासक संघर्षों के दौरान देवी प्रदत्त तलवारों से लड़े: एनसीईआरटी किताब

शिवाजी, बस्तर के राजा और अन्य शासक संघर्षों के दौरान देवी प्रदत्त तलवारों से लड़े: एनसीईआरटी किताब
Modified Date: September 29, 2026 / 05:26 pm IST
Published Date: September 29, 2026 5:26 pm IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की नई किताब के अनुसार, भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है और सातवीं सदी के बाद से कई राजा और राजकुमार लड़ाई के समय काली, दुर्गा, भवानी और शक्ति के दूसरे रूपों को रक्षक के तौर पर याद करते थे।

‘‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – पार्ट 2’’ नाम की यह किताब नए शिक्षण सत्र के शुरू होने के छह महीने बाद, मंगलवार को जारी की गई। इस किताब का पहला भाग जून में जारी किया गया था।

किताब के ‘रसिस्टेंस एंड रीजिलियन्स’ (प्रतिरोध और मजबूती) शीर्षक वाले अध्याय में सातवीं सदी के बाद से भारतीय उपमहाद्वीप पर लगातार हुए हमलों का जिक्र है और साथ ही युद्ध में धार्मिक परंपराओं का भी वर्णन किया गया है।

किताब में लिखा है, ‘‘भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। काली, दुर्गा और भवानी जैसी देवियों की पूजा को एक पुरानी प्रथा बताया गया है, जिसमें शासक लड़ाई के समय शक्ति के रूपों को रक्षक के तौर पर याद करते थे।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘माना जाता है कि बस्तर के शासक अन्नमराजा को उनकी तलवार माणिक्यदेवी (दंतेश्वरी) से मिली थी, जबकि विजयनगर के कुमार कंपन ने मदुरै में सल्तनत की सेनाओं के खिलाफ देवी से मिली तलवार का इस्तेमाल किया था। इसी तरह, पारंपरिक रूप से यह भी माना जाता है कि शिवाजी को देवी तुलजा भवानी से तलवार मिली थी।’’

इस अध्याय में बताया गया है कि भारतीय उपमहाद्वीप ने सातवीं सदी के बाद से क्षेत्रीय विस्तार और धार्मिक उद्देश्य से प्रेरित हमलों का लगातार सामना किया। इसमें यह भी बताया गया है कि भारतीय शासकों और समुदायों ने अरब, तुर्की, मुगल और यूरोपीय सेनाओं का विरोध कैसे और कब किया।

एनसीईआरटी प्रमुख दिनेश सकलानी के अनुसार, ‘‘इस (माध्यमिक) स्तर पर सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई से विश्लेषणात्मक और तार्किक क्षमता विकसित होने, आलोचनात्मक पड़ताल को बढ़ावा मिलने, अलग-अलग संस्कृतियों की समझ बढ़ने और सीखने वालों को नागरिक व सामाजिक जीवन में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ भाग लेने में सक्षम बनाने की उम्मीद की जाती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसी भावना के साथ माध्यमिक स्तर के लिए किताब ‘‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – पार्ट 2’’ की रूपरेखा तैयार की गई और इसे विकसित किया गया है।’’

भाषा वैभव नरेश

नरेश


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