ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग या फव्वारा? कोर्ट ​कमिश्नर की रिपोर्ट में कई अहम खुलासे! जानिए उन्होंने क्या कहा

कोर्ट ​कमिश्नर की रिपोर्ट में कई अहम खुलासे! जानिए उन्होंने क्या कहा! Shivling or fountain in Gyanvapi Mosque? What Says commissioner

Edited By: , May 19, 2022 / 08:08 PM IST

वाराणसी: Shivling or fountain in Gyanvapi  ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शिवलिंग मिलने वाले स्थान को सुरक्षित करने का और नमाज बंद नहीं करने का निर्देश दिया है। वहीं दूसरी ओर मस्जिद में सर्वे के बाद कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह ने गुरुवार को वाराणसी सिविल कोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी है। कमिश्नर विशाल सिंह ने अपने रिपोर्ट में कई अहम बातों का खुलासा किया है।

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रिपोर्ट में कई अहम खुलासे

Shivling or fountain in Gyanvapi  अजय कुमार मिश्र की तरह विशाल सिंह की रिपोर्ट में भी मस्जिद परिसर में हिंदु आस्था से जुड़े कई निशान मिलने की बात कही गई है। रिपोर्ट में शिवलिंग बताए जा रहे पत्थर को लेकर भी डिटेल में जानकारी दी गई है। विशाल सिंह की रिपोर्ट में कहा गया है कि वजूखाने में पानी कम करने पर 2.5 फीट का एक गोलाकार आकृति दिखाई दी, जो शिवलिंग जैसा है। गोलाकार आकृति ऊपर से कटा हुआ डिजाइन का अलग सफेद पत्थर है। जिसके बीच आधे इंच से का छेद है, जिसमें सींक डालने पर 63 सेंटीमीटर गहरा पाया गया। इसे वादी पक्ष ने शिवलिंग बताया तो प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि यह फव्वार है।

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कथित फव्वारे को चालकर दिखाएं

रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदू पक्षकारों ने सर्वे के दौरान कथित फव्वारे को चालकर दिखाने को कहा। हालांकि, मस्जिद कमेटी के मुंशी ने फव्वारा चलाने में असमर्थता जताई। फव्वारे पर मस्जिद कमेटी ने गोल-मोल जवाब दिया। पहले 20 साल और फिर 12 साल से इसके बंद होने की बात कही गई। कथित फव्वारे में पाइप जाने की कोई जगह नहीं मिली है।

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हिंदू आस्था के कई निशान

रिपोर्ट में तहखाने के अंदर मिले साक्ष्यों का जिक्र करते हुए कहा है कि दरवाजे से सटे लगभग 2 फीट बाद दीवार पर जमीन से लगभग 3 फीट ऊपर पान के पत्ते के आकार की फूल की आकृति बनी थी, जिसकी संख्या 6 थी। तहखाने में 4 दरवाजे थे, उसके स्थान पर नई ईंट लगाकर उक्त दरावों को बंद कर दिया गया था। तहखाने में 4-4 पुराने खम्भे पुराने तरीके के थे, जिसकी ऊंचाई 8-8 फीट थी। नीचे से ऊपर तक घंटी, कलश, फूल के आकृति पिलर के चारों तरफ बने थे। बीच में 02-02 नए पिलर नए ईंट से बनाए गए थे, जिसकी वीडियोग्राफी कराई गई है। एक खम्भे पर पुरातन हिंदी भाषा में सात लाइनें खुदी हुईं, जो पढ़ने योग्य नहीं थी। लगभग 2 फीट की दफती का भगवान का फोटो दरवाजे के बाएं तरफ दीवार के पास जमीन पर पड़ा हुआ था जो मिट्टी से सना हुआ था।

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स्वास्तिक और त्रिशूल की कलाकृतियां

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अन्य तहखाने में पश्चिमी दीवार पर हाथी के सूंड की टूटी हुई कलाकृतियां और दीवार के पत्थरों पर स्वास्तिक और त्रिशूल और पान के चिन्ह और उसकी कलाकृतियां बहुत अधिक भाग में खुदी हैं। इसके साथ ही घंटियां जैसी कलाकृतियां भी खुदी हैं। ये सब कलाकृतियां प्राचीन भारतीय मंदिर शैली के रूप में प्रतीत होती है, जो काफी पुरानी है, जिसमें कुछ कलाकृतियां टूट गई हैं।

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