Pakistan Protest News: पाकिस्तान में होगा तख्तापलट? इमरान खान के समर्थकों ने मचाया कोहराम, राष्ट्रपति जरदारी डरकर इस्लामाबाद छोड़कर फरार, हालात बेकाबू…
Pakistan Protest News: पाकिस्तान में होगा तख्तापलट? इमरान खान के समर्थकों ने मचाया कोहराम, राष्ट्रपति जरदारी डरकर इस्लामाबाद छोड़कर फरार, हालात बेकाबू...
Pakistan Protest News/Image Source: Social media
- इस्लामाबाद-कराची से लेकर रावलपिंडी तक प्रदर्शन
- पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में प्रदर्शन
- घबराई पाकिस्तान सरकार, राष्ट्रपति जरदारी ने छोड़ा इस्लामाबाद
Pakistan Protest News: इस्लामाबाद, कराची, लाहौर और रावलपिंडी समेत पाकिस्तान के कई बड़े शहर शनिवार रात हिंसक प्रदर्शनों की चपेट में आ गए। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में उनके समर्थक बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया।
इस्लामाबाद से कराची तक उग्र प्रदर्शन (Pakistan Protest Update)
Pakistan Protest News: राजधानी इस्लामाबाद से लेकर कराची और रावलपिंडी तक प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। रावलपिंडी स्थित आदियाल जेल के बाहर भी समर्थकों की भारी भीड़ जुटी रही। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर हालात हिंसक हो गए और उपद्रवियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस पर पथराव भी किया गया जिसके बाद सुरक्षाबलों ने सख्ती दिखाई। पुलिस ने कम से कम 10 लोगों को हिरासत में लिया है। शहरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के इस्लामाबाद छोड़ने की खबरों ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। वहीं बिलावल भुट्टो ज़रदारी और आसिफा भुट्टो की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। सूत्रों के मुताबिक प्रशासन इमरान खान को नई जेल में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
🚨🇵🇰 इमरान खान समर्थकों का प्रदर्शन 🔥
पाकिस्तान के स्वाबी मोटरवे को इमरान खान के समर्थकों ने जाम कर दिया ।
📌 पूर्व पीएम खान की आंखों की रोशनी सलाखों के पीछे बंद हालात और बेगैरत सरकार के रवैए से जा चुकी है।
📌 इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पाकिस्तान में जगह जगह प्रदर्शन हो रहे… pic.twitter.com/sjws1EXssO— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) February 14, 2026
‘जीने दो कराची’ अभियान भी बना वजह (Imran Khan Supporters Protest)
Pakistan Protest News: बताया जा रहा है कि शनिवार को जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ता भी ‘जीने दो कराची’ अभियान के तहत शहर की खराब सड़कों, ड्रेनेज समस्या और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता सिंध असेंबली की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने जब बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की तो स्थिति बिगड़ गई और कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद झड़पें शुरू हो गईं और माहौल तनावपूर्ण हो गया। देश के कई हिस्सों में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रमुख शहरों में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इमरान खान समर्थकों की रैली थी
पाकिस्तान की सेना ने चारों तरफ से घर कर जलियांवाला बाग की तरह फायरिंग कर दी
अभी तक 40 से ज्यादा इमरान खान के समर्थक मारे गए हैं pic.twitter.com/rqdPb3H4n6
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) September 8, 2024
क्या पाकिस्तान में होगा तख्तापलट? (akistan Political Crisis 2026)
पाकिस्तान में जारी राजनीतिक अस्थिरता, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद तेज हुए विरोध प्रदर्शन और सरकार-विपक्ष के टकराव ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या देश एक बार फिर तख्तापलट की ओर बढ़ रहा है? हालांकि फिलहाल किसी सैन्य कार्रवाई या सत्ता परिवर्तन के आधिकारिक संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि वहां राजनीतिक संकट कई बार बड़े घटनाक्रम में बदल चुका है। 1958, 1977 और 1999 में देश सैन्य तख्तापलट देख चुका है। 1999 में जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार को हटाकर सत्ता संभाली थी।
नेपाल में हालिया घटनाक्रम
नेपाल में हाल ही में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हुए, जिन्होंने सरकार को संकट में डाल दिया। जनआक्रोश और राजनीतिक अस्थिरता के चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान संसद भवन और सरकारी परिसरों को निशाना बनाया गया तथा कई लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबरें सामने आईं। हालांकि नेपाल का घटनाक्रम पूरी तरह सैन्य तख्तापलट नहीं था लेकिन जनदबाव से सत्ता परिवर्तन की स्थिति जरूर बनी।
बांग्लादेश और अन्य उदाहरण
बांग्लादेश भी कई बार तख्तापलट का दंश झेल चुका है। 1975 में संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद सैन्य शासन का दौर शुरू हुआ था। इसके बाद भी वहां राजनीतिक अस्थिरता बनी रही। इसी तरह श्रीलंका में 2022 के आर्थिक संकट के दौरान जनता के व्यापक विरोध ने सरकार को सत्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। हालांकि वह पारंपरिक सैन्य तख्तापलट नहीं था लेकिन जनआंदोलन ने सत्ता परिवर्तन की राह बनाई।
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