पश्चिम एशिया की स्थिति पर संसद में अल्पकालिक चर्चा होनी चाहिए : कांग्रेस

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पश्चिम एशिया की स्थिति पर संसद में अल्पकालिक चर्चा होनी चाहिए : कांग्रेस

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 01:57 PM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 01:57 PM IST

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि आगामी नौ मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में पश्चिम एशिया की स्थिति पर अल्पकालिक चर्चा होनी चाहिए और सरकार की तरफ से वक्तव्य देना पर्याप्त नहीं होगा।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि वर्तमान सरकार बहुत कमजोर है और भारत की वैश्विक साख पहले इतनी कमजोर नहीं रही है जितनी आज है।

रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बजट सत्र के दूसरे चरण में कई बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे रहने वाले हैं। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, रूस से भारत द्वारा तेल खरीद को लेकर अमेरिका का लगातार दबाव, ईरान के सर्वोच्च नेता तथा कई सैन्य नेताओं की लक्षित हत्याएं और पूरे पश्चिम एशिया में फैल चुका संघर्ष महत्वपूर्ण विषय हैं।’’

उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले तथा उसके बाद ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए हमले स्थिति को और गंभीर बना चुके हैं। ‘‘इस क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जिनकी ज़िंदगी, आजीविका इन हालात में प्रभावित होती है। यह हमारे लिए एक बहुत महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दा भी है, क्योंकि इस क्षेत्र से हर साल लगभग 50-60 अरब डॉलर की राशि भारतीय नागरिक देश में भेजते हैं।’’

रमेश ने कहा कि इन हालात को देखते हुए बजट सत्र के दूसरे चरण में पश्चिम एशिया की स्थिति पर तत्काल चर्चा की मांग की जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले भी विदेश मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की मांग कर चुके हैं। हमने रक्षा मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के कामकाज पर भी चर्चा की मांग की थी। अब इस विषय की अहमियत और बढ़ गई है। जब संसद नौ मार्च को दोबारा बैठेगी, तब हम निश्चित रूप से ये मांगें उठाएंगे।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या विपक्ष पश्चिम एशिया के मामले पर चर्चा के बाद सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जवाब की मांग करेगा तो रमेश ने कहा, ‘‘सिर्फ बयान देने का कोई मतलब नहीं होता, क्योंकि उन बयानों पर स्पष्टीकरण मांगने की अनुमति नहीं दी जाती है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ हुए समझौते पर बयान दिया, लेकिन लोकसभा या राज्यसभा में सदस्यों को कोई स्पष्टीकरण मांगने की अनुमति नहीं दी गई।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘हम एक अल्पकालिक चर्चा चाहते हैं। केवल सरकार की ओर से बयान देने से कोई फायदा नहीं है, क्योंकि मंत्री आएंगे, बयान देंगे और चले जाएंगे, और किसी को प्रश्न पूछने की अनुमति नहीं होगी।’’

रमेश ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिका और इज़राइल की ईरान के खिलाफ आक्रामकता तथा उसके बाद ईरान की प्रतिक्रिया, हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और किसानों के हितों के समर्पण जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के एक बयान का हवाला देते हुए कहा, ‘‘आज अमेरिकी वित्त मंत्री का बयान आया है, जिसमें कहा गया कि वह हमें रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दे रहे हैं। इससे क्या पता चलता है? अमेरिकी वित्त मंत्री के आधिकारिक बयान की भाषा भारत को एक याचक की तरह दिखाती है, मानो वह हम पर कोई एहसान कर रहे हों। भारत इस पर चुप है।’’

उन्होंने क्रिकेट की शब्दावली की उपमा देते हुए कहा, “यह सरकार लंबे समय से एक ‘स्टिकी विकेट’ पर है। वॉशिंगटन से लगातार गुगली फेंकी जा रही हैं। 10 मई को अचानक ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की घोषणा एक गुगली की तरह आई। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 100 से अधिक बार ऑफ-ब्रेक, लेग-ब्रेक या गुगली फेंकने की कोशिश की है।’’

रमेश ने दावा किया कि भारत सरकार कमजोर दिखाई दे रही है।

उन्होंने 1970 के दशक के एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कि उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की तमाम धमकियों के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दो टूक कहा था कि वह वही करेंगे जो भारत के हित में होगा और फिर उन्होंने ऐसा ही किया।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी विपक्षी नेताओं को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते, लेकिन जब बात राष्ट्रपति ट्रंप या इज़राइल की कार्रवाइयों की आती है, तो पूरी तरह चुप रहते हैं। यह वह भारत नहीं है जिसे दुनिया जानती थी।”

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा