श्रीराम भारतीय कला केंद्र की नृत्य नाटिका ‘कृष्णा’ के मंचन के 50 साल पूरे

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श्रीराम भारतीय कला केंद्र की नृत्य नाटिका ‘कृष्णा’ के मंचन के 50 साल पूरे

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  • Publish Date - September 2, 2026 / 04:02 PM IST,
    Updated On - September 2, 2026 / 04:02 PM IST

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) श्रीराम भारतीय कला केंद्र (एसबीकेके) की प्रसिद्ध नृत्य नाटिका ‘कृष्णा’ के मंचन के 50 साल पूरे हो गए हैं। एक बार फिर से इसका मंचन यहां कमानी सभागार में किया जा रहा है।

इस साल 29 अगस्त से शुरू हुई इस नृत्य नाटिका की मूल परिकल्पना 1977 में सुमित्रा चरत राम ने ‘कृष्ण अवतार’ के रूप में की थी। वर्तमान में इसका निर्देशन एसबीकेके की अध्यक्ष शोभा दीपक सिंह कर रही हैं, जबकि इसका नृत्य निर्देशन शशिधरन नायर और राज कुमार शर्मा ने किया है।

जन्माष्टमी के अवसर पर हर साल इस नृत्य नाटिका का मंचन किया जाता है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की यात्रा को दर्शाता है। ‘कृष्णा’ में गोकुल और वृंदावन से लेकर राधा के साथ उनके संबंध, कंस वध, महाभारत में उनकी भूमिका और कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को दिए गए उनके उपदेश तक की कथा प्रस्तुत की जाती है।

आयोजकों के अनुसार यह प्रस्तुति संयम, क्षमा, कर्तव्य और नैतिक निर्णयों के जरिए मानवीय जटिलताओं के बीच दिव्यता को दर्शाती है।

शोभा दीपक सिंह ने इस नृत्य नाटिका के सफर को याद करते हुए कहा कि एसबीकेके 1952 में स्थापना के समय से ही भगवान श्रीकृष्ण की कथा से रचनात्मक रूप से जुड़ा रहा है, लेकिन 1977 में उनकी मां सुमित्रा चरित राम ने पहली बार इस पर आधारित पूर्ण नृत्य नाटिका तैयार की थी।

इसकी पहली प्रस्तुति का नृत्य निर्देशन शेखरन पणिक्कर ने किया था और इसमें भक्ति रस तथा सूरदास के पदों का गहरा प्रभाव था।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इसे लोगों ने बहुत पसंद किया और यह हर साल जारी रहा। समय के साथ इसमें कई रचनात्मक बदलाव किए गए। वर्ष 1996 में ‘कृष्ण कथा’ नाम से इसका एक नया संस्करण तैयार किया गया, जिसका नृत्य निर्देशन शशिधरन नायर ने किया और निर्देशन मैने स्वयं किया।’’

शोभा दीपक सिंह ने कहा कि 1996 की प्रस्तुति में हिंदी संवाद, नाटकीय दृश्य और नया संगीत शामिल किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘आज की नृत्य नाटिका ‘कृष्णा’ 1977 और 1996 के दोनों संस्करणों के तत्वों को मिलाकर तैयार की गयी है। इसमें आधुनिक तकनीक जैसे बेहतर प्रकाश व्यवस्था, एलईडी आदि का भी उचित इस्तेमाल किया गया है। हर पीढ़ी के साथ कलाकार बदलते रहते हैं, लेकिन उन्हें केंद्र की उसी नृत्य नाट्य शैली में प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसे हमने 1957 में अपनी पहली रामलीला तैयार करने के बाद विकसित किया था।’’

इस नृत्य नाटिका का संगीत अब भी मुख्य रूप से भक्ति शैली की रचनाओं पर आधारित है। इसमें सूरदास के ‘सूर सागर’ के पदों का इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें मूल ब्रज भाषा में गाया जाता है।

लगभग ढाई घंटे की यह प्रस्तुति महाभारत के युद्ध क्षेत्र को भी दिखाती है, जहां भगवद्गीता को शांति और जिम्मेदार कर्म का ऐसा संदेश बताया गया है।

सिंह ने कहा, ‘‘50 वर्षों से ‘कृष्णा’ ने हर पीढ़ी को इस कथा को अपने सवालों और अनुभवों के नजरिये से देखने का अवसर दिया है। मुझे उम्मीद है कि युवा दर्शक इसमें अपने जीवन से जुड़ी कोई बात जरूर महसूस करेंगे।’’

इस वर्ष की प्रस्तुति में एलईडी स्क्रीन और डिजिटल पृष्ठभूमि का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसके बजाय हाथ से तैयार किए गए पारंपरिक मंच सज्जा और जीवंत रंगमंच डिजाइन के माध्यम से प्रस्तुति को भव्य रूप दिया गया है।

आयोजकों के अनुसार, आगे भी ‘कृष्णा’ का मंचन केंद्र में तैयार किए गए पारंपरिक परिधान, आभूषण, विशेष मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था के साथ किया जायेगा।

इस वर्ष का अंतिम मंचन चार सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर होगा।

भाषा रवि कांत रवि कांत देवेंद्र

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