शुभांशु ने फिल्म ‘फाइंडिंग नीमो’ से मिले सबक का जिक्र कर युवाओं से कहा, प्रयत्न जारी रखें
शुभांशु ने फिल्म ‘फाइंडिंग नीमो’ से मिले सबक का जिक्र कर युवाओं से कहा, प्रयत्न जारी रखें
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) असफलताओं से उबरना सीखें, कभी संतुष्ट ना रहें और प्रगति की दिशा में निरंतर बढ़ते रहें। सफलता के ये मंत्र दो अंतरिक्ष यात्रियों शुभांशु शुक्ला और प्रशांत नायर ने रविवार को यहां एक संवाद सत्र में युवाओं के साथ साझा किये।
यहां जारी ‘विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद’ में शुक्ला ने फिल्म ‘फाइंडिंग नीमो’ के सबक-‘प्रयत्न करते रहें’, ‘कभी हार नहीं मानें’ – को याद किया और देश भर के युवाओं से अनुरोध किया कि वे सफलता प्राप्त करने के लिए खुद के द्वारा चयनित कार्यों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।
युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एक अनौपचारिक बातचीत में शुक्ला ने कहा, ‘‘हमें यह समझना और महसूस करना चाहिए कि हमारे पास क्या है। असल में हम इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि हमारे पास क्या नहीं है। आपके पास जो है उसका सम्मान करें, उसका भरपूर उपयोग करें और सफलता बिना मांगे ही आपके पास लौटकर आएगी।’’
पिछले साल एक्सिओम-4 मिशन के लिए शुक्ला के साथ प्रशिक्षण लेने वाले नायर ने युवाओं से भारत को अपना आदर्श और प्रेरणास्रोत मानते हुए देश के कल्याण के लिए काम करने का आग्रह किया।
नायर ने कहा, ‘‘मेरा आदर्श यह महान देश, भारत है। इस धरती पर मौजूद सभी महान आत्माओं को इस स्थान से ऊर्जा मिली है। आप जब भी कुछ करें, याद रखें कि आपको विकसित भारत तक पहुंचाने वाला कोई एक व्यक्ति नहीं है, बल्कि पूरा देश है।’’
गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक नायर ने कहा, ‘‘भारत को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हुए आप जो भी करें, भारत माता की उन्नति के लिए करें।’’
इससे पहले, शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में अपने 18 दिनों के प्रवास के अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि बचपन में वे हवाई शो देखकर बहुत रोमांचित हो जाते थे, लेकिन दोस्तों से प्रेरणा लेकर रक्षा पाठ्यक्रम के लिए आवेदन भरते समय वे संयोगवश लड़ाकू पायलट बन गए।
उन्होंने कहा, ‘‘बचपन में मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अंतरिक्ष यात्री बनूंगा। मैं ‘अगर ऐसा होता तो क्या होता’ जैसी बातों में विश्वास नहीं करता। मेरा मानना है कि अभी आपके पास जो है, आप उसका क्या कर सकते हैं, उसी पर ध्यान देना चाहिए।’’
शुक्ला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर समय बिताने से उन्हें जो अनुभव मिला उससे भारत को खुद का अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करने में बहुत मदद मिलेगी।
अंतरिक्ष यात्री के चयन के बारे में उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के दौरान जिन गुणों पर विचार किया जाता है, उनमें से एक है लचीलापन और उम्मीदवारों के असफलताओं से उबरने का तरीका।
शुक्ला ने कहा, ‘‘असफलताओं से उबरना सीखें। मन में संदेह होना स्वाभाविक है। लेकिन एक-दो असफलताएं आपको परिभाषित नहीं करतीं। असफलता से उबरना, असफलता या सफलता से ऊपर उठकर अगला कदम बढ़ाना ही महत्वपूर्ण है। कभी संतुष्ट ना हों, हमेशा प्रगति की दिशा में बढ़ते रहें।’’
भाषा संतोष रंजन
रंजन

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