भारतीय महिलाओं में मासिक धर्म स्वच्छता में सुधार के संकेत : नवीनतम सरकारी सर्वेक्षण

भारतीय महिलाओं में मासिक धर्म स्वच्छता में सुधार के संकेत : नवीनतम सरकारी सर्वेक्षण

भारतीय महिलाओं में मासिक धर्म स्वच्छता में सुधार के संकेत : नवीनतम सरकारी सर्वेक्षण
Modified Date: May 30, 2026 / 12:53 pm IST
Published Date: May 30, 2026 12:53 pm IST

नयी दिल्ली, 30 मई (भाषा) राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान स्वच्छ सुरक्षा उपायों का उपयोग 2019-21 के 77.6 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 79.2 प्रतिशत हो गया है।

मासिक धर्म सुरक्षा के स्वच्छ तरीकों के उपयोग में यह वृद्धि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के तहत संचालित मासिक धर्म स्वच्छता योजना (एमएचएस) तथा प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के अंतर्गत उपलब्ध कराए जा रहे सस्ते सैनिटरी उत्पादों जैसी पहलों के कारण संभव हुई है।

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि कम-से-कम एक बार इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या 2019-21 के दौरान 33.3 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 64.3 प्रतिशत हो गई, यानी यह लगभग दोगुना हो गया है।

आंकड़ों के अनुसार, बैंक या बचत खाते रखने वाली महिलाओं की संख्या 2019-21 के 78.6 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 89 प्रतिशत हो गई। वहीं, निजी मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 53.9 प्रतिशत से बढ़कर 63.6 प्रतिशत हो गया।

स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, 15-24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान स्वच्छ सुरक्षा उपायों का उपयोग 77.6 प्रतिशत से बढ़कर 79.2 प्रतिशत हो गया है।

मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मासिक धर्म स्वच्छता योजना तथा प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत उपलब्ध किफायती सैनिटरी उत्पादों ने सुरक्षित मासिक धर्म स्वच्छता संबंधी जागरूकता, उपलब्धता और उपयोग को बढ़ावा दिया है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘सर्वेक्षण के निष्कर्ष मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तीकरण और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में लगातार हो रही प्रगति को दर्शाते हैं।’’

हालांकि, मंत्रालय ने यह भी कहा कि गैर-संचारी रोगों (एनसीडी), जीवनशैली से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों, कुपोषण और वयस्कों में बढ़ते मोटापे जैसी नयी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, व्यवहार परिवर्तन और संतुलित पोषण रणनीतियों पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता है।

एनएफएचएस-6, 2023-24 के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कराया गया, जबकि मुंबई स्थित अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान इसकी नोडल एजेंसी रहा।

लगभग 6.79 लाख परिवारों और 715 जिलों को शामिल करने वाला यह सर्वेक्षण जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतकों की जानकारी उपलब्ध कराता है तथा जिला स्तर तक साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण और कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता करता है।

भाषा गोला नेत्रपाल

नेत्रपाल


लेखक के बारे में