रेशम की पतंग, डायमंड डीए62 प्रोपेलर विमान की प्रतिकृति जर्मन चांसलर को उपहार में दी गई
रेशम की पतंग, डायमंड डीए62 प्रोपेलर विमान की प्रतिकृति जर्मन चांसलर को उपहार में दी गई
नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) भारत की यात्रा पर आए जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को पारंपरिक और विशिष्ट भारतीय शिल्पकला से जुड़े उपहार भेंट किए गए जिनमें ‘पटोला रेशम’ से बनी और दीवार पर टांगी जाने वाली रेशमी पतंग और उच्च गुणवत्ता वाले चमड़े से तैयार एक ‘विशेष पायलट लॉगबुक’ शामिल है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि चांसलर मर्ज के ‘डायमंड डीए62 प्रोपेलर विमान’ की पीतल की प्रतिकृति भी भेंट की गई। इसे उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद (जो धातु शिल्पकला का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध केंद्र है) के कुशल कारीगरों द्वारा हाथ से बनाया गया है। सोने की परत से सुसज्जित यह कलाकृति मानवीय कला का उत्कृष्ट संगम है।
अधिकारियों के अनुसार जर्मन वैमानिकी डिजाइन और भारतीय धातु शिल्पकला के समन्वय से तैयार यह कलाकृति दोनों देशों के बीच सहयोग, साझा मूल्यों और मजबूत साझेदारी को दर्शाती है।
जर्मन नेता को विशेष ‘पायलट लॉगबुक’ भेंट की गई। भारत में कुशल कारीगरों द्वारा निर्मित यह लॉगबुक, आधुनिक डिजाइन मानकों के अनुरूप देश की उत्कृष्ट ‘चर्म शिल्प परंपरा’ को दर्शाती है।
अधिकारियों के अनुसार, निरंतरता, निखार और टिकाऊपन पर जोर देने वाली यह लॉगबुक सटीकता, दूरदर्शिता और सघन परिश्रम का प्रतीक है-जो विमानन और नेतृत्व दोनों के लिए अहम है।
मर्ज को भारत के सबसे मशहूर कपड़ों में से एक ‘पटोला सिल्क’ से बनी और दीवार पर टांगी जाने वाली रेशमी पतंग भी भेंट की गई। इस रेशम का उत्पादन गुजरात के पाटन में होता है।
दुर्लभ ‘डबल-इकत तकनीक’ से बुना गया यह कपड़ा (जिसमें बुनाई से पहले ताने और बाने, दोनों धागों को रंगरोधक विधि से रंगा जाता है) असाधारण सटीकता, धैर्य और दूरदर्शिता का प्रतीक है। इसके परिणामस्वरूप दोनों ओर समान रूप से दिखाई देने वाले पूरी तरह संतुलित डिज़ाइन तैयार होते हैं।
पारंपरिक ज्यामितीय और पुष्प सरीखी आकृतियां संतुलन, निरंतरता और सामंजस्य का प्रतीक हैं।
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश

Facebook


