सिंगापुर, दो मई (भाषा) भारतीय दार्शनिक नारायण गुरु से प्रेरित सिंगापुर की आठ दशक पुरानी एक संस्था ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती बुजुर्ग आबादी से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों से सहयोग की अपील की है।
नारायण गुरु 19वीं सदी के उत्तरार्ध में केरल के एक समाज सुधारक थे, जिन्होंने जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करते हुए आध्यात्मिक समानता व सामाजिक न्याय का समर्थन किया।
सिंगापुर की गैर-लाभकारी संस्था श्री नारायण मिशन (एसएनएम) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस. देवेंद्रन ने बुजुर्गों की देखभाल के लिए सरकार, सामाजिक सेवा एजेंसियों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, सामुदायिक संगठनों और निजी क्षेत्र के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
पूर्व सैन्य अधिकारी और पिछले एक दशक से एसएनएम से जुड़े देवेंद्रन ने कहा कि देश-विदेश के लोगों और संस्थाओं को मिलकर यह पता लगाना चाहिए कि बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए कौन-सी नयी नीतियां और सेवाएं बेहतर काम कर सकती हैं।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हमें वृद्धावस्था को पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी के रूप में देखना होगा। हर व्यक्ति को अपनी पसंद से जीने और अपने जीवन के अंतिम वर्षों को अपने तरीके से बिताने की आजादी मिलनी चाहिए।”
देवेंद्रन ने कहा, “हमें केवल दान देने से आगे बढ़ना होगा। बुजुर्गों की देखभाल के लिए प्रत्यक्ष सेवा और साझा जिम्मेदारी जरूरी है। इसमें सरकार समर्थित संस्थानों को मजबूत करना भी शामिल है, ताकि बुजुर्ग आराम, गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जी सकें।”
भाषा जोहेब नेत्रपाल
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