विधानसभा चुनावों के बाद शेष 22 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू हो सकती एसआईआर

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विधानसभा चुनावों के बाद शेष 22 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू हो सकती एसआईआर

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  • Publish Date - April 7, 2026 / 04:36 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 04:36 PM IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) निर्वाचन आयोग इस महीने पांच विधानसभाओं के चुनाव के बाद दिल्ली सहित शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का तीसरा और अंतिम चरण शुरू कर सकता है।

इस महीने केरल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं और मतगणना चार मई को होगी।

आयोग के अधिकारियों ने बताया कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में दूसरे एवं अंति चरण का मतदान समाप्त होने के बाद एसआईआर शुरू किया जा सकता है। एक और संभावना है कि चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद इस कवायद को बड़े पैमाने पर शुरू किया जाए।

अब तक, एसआईआर 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में किया जा चुका है। असम में मतदाता सूची का ‘विशेष पुनरीक्षण’ किया गया है।

जिन राज्यों में अब तक एसआईआर किया गया, उनमें सिर्फ उत्तर प्रदेश में अब तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित नहीं हुई है।

अब तक के एसआईआी में लगभग 99 करोड़ मतदाताओं में से 60 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया है।

शेष लगभग 39 करोड़ मतदाताओं को 17 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित एसआईआर की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

बीते 19 फरवरी को निर्वाचन आयोग ने दिल्ली सहित 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि वो एसआईआर से संबंधित प्रारंभिक कार्य जल्द से जल्द पूरा करें, क्योंकि यह कवायद‘‘अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है’’।

एक बार इन राज्यों में यह कवायद पूरी होने के बाद पूरे देश में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन एवं दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे पत्र में आयोग ने कहा कि मतदाता सूची के अखिल भारतीय एसआईआर का आदेश पिछले साल जून में दिया गया था।

विभिन्न कारणों से एसआईआर से जुड़े कार्यक्रम में बार-बार बदलाव हुआ।

बिहार की तरह राजनीतिक दलों ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में एसआईआर को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

हाल ही में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने व्यक्तिगत रूप से अपने राज्य में एसआईआर के खिलाफ प्रधान न्यायाधीश की पीठ के समक्ष गुहार लगाई थी।

जब निर्वाचन आयोग बिहार में एसआईआर की तैयारी कर रहा था तब इसके कई अधिकारियों ने दावा किया था कि उनके जमीनी स्तर के पदाधिकारियों को बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमा के कई नागरिक मिले थे।

हालांकि, आयोग ने ऐसे लोगों की कोई संख्या या सबूत साझा नहीं किया जो मतदाता सूची में शामिल होने के पात्र नहीं थे।

विपक्षी दलों ने आयोग के दावों को भाजपा और उसके सहयोगियों का समर्थन नहीं करने वाले मतदाताओं को लक्षित करके एसआईआर की कवायद को अंजाम देने की एक चाल करार दिया था।

भाषा हक

हक संतोष

संतोष