अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की जांच के लिए मंदिर परिसर पहुंची एसआईटी
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की जांच के लिए मंदिर परिसर पहुंची एसआईटी
अयोध्या, 15 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भगवान श्री रामलला मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की तीन सदस्यीय टीम सोमवार को जांच के सिलसिले में मंदिर परिसर पहुंची।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी के सदस्य गेट नंबर 11 के माध्यम से मंदिर परिसर में दाखिल हुए।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। यह मंदिर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा प्रबंधित है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तथा ट्रस्ट के अनुरोध पर यह एसआईटी गठित की गई है। ट्रस्ट ने इसे “भ्रामक सूचनाओं को रोकने और सच्चाई सामने लाने” के लिए आवश्यक बताया था और कहा था कि राम मंदिर की छवि को धूमिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
ट्रस्ट ने सरकार से मामले की विस्तृत जांच कराने का आग्रह किया था ताकि तथ्यों की पुष्टि हो सके और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर विराम लगाया जा सके।
राज्य सरकार के अनुसार, एसआईटी मामले की व्यापक जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
इस बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोमवार को कहा कि एसआईटी जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
मिश्र ने कहा, ‘‘जांच के दो पहलू हैं-आपराधिक और भविष्य में सुधार से संबंधित। जब दोनों पहलुओं पर काम होगा तभी हम श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत कर पाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट जांच में पूरा सहयोग करेगा और एसआईटी को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मिश्र ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने रविवार को जिला प्रशासन से भी बातचीत की थी और प्रशासन ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
मिश्र ने कहा, ‘‘यह एक सामूहिक प्रयास है और एक तरह से मंदिर के लिए महत्वपूर्ण दौर भी। हमें इस दौर से गुजरते हुए भविष्य की दिशा तय करनी है।’’
भक्तों की संख्या पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मिश्र ने कहा, ‘‘भक्तों की संख्या को लेकर कोई सवाल नहीं है। श्रद्धालु भगवान के प्रति समर्पण भाव से आते हैं। वे दान करते हैं…। हमारे सनातन धर्म में भी कहा गया है कि दान करो और उसे भूल जाओ। न तो इसका पता लगाया जाता है, न ही भगवान के साथ कोई वस्तु विनिमय (प्रणाली) है, (जब से) मैंने दान किया है।’’
उन्होंने कहा कि यह सनातन धर्म की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
मिश्र ने कहा, ‘‘श्रद्धा और दान की यह धारा निरंतर प्रवाहित होती रहेगी और इसमें कोई बाधा नहीं आएगी।’’
इस सवाल पर कि क्या एसआईटी जांच के लिए दिल्ली से किसी वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया जा रहा है, मिश्र ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह पूरी तरह एक गलत जानकारी है। यह राज्य सरकार और जिला प्रशासन का विषय है। जैसा कि आम बोलचाल में कहा जाता है कि ‘नैया पार लगानी है’, तो दोनों (राज्य सरकार और जिला प्रशासन) ही ऐसा करेंगे।’’
उधर, युवा कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के एक पदाधिकारी शरद शुक्ला ने अयोध्या में एक बैनर लगाया है, जिसमें लिखा गया है कि जो भी राम मंदिर की संपत्ति या धन की चोरी करने का प्रयास करेगा, उसे 60,000 वर्षों तक कीड़े के रूप में नरक में सड़ना पड़ेगा।
इस बैनर में स्कंद पुराण का एक श्लोक भी उल्लेखित है, जिसका अर्थ है कि “भगवान रामलला स्वयं न्याय करेंगे।”
यह विवाद सात जून को तब सामने आया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त करोड़ों रुपये गायब होने की रिपोर्टें सामने आई हैं और उन्होंने अदालत से मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि आंतरिक ऑडिट जारी है और अब तक ऐसे कोई तथ्य सामने नहीं आए हैं जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके।
भाषा
सं, आनन्द रवि कांत

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