सामान बेचने की आड़ में पंजीकरण शुल्क ऐंठने वाले अंतर-राज्यीय गिरोह के छह सदस्य गिरफ्तार
सामान बेचने की आड़ में पंजीकरण शुल्क ऐंठने वाले अंतर-राज्यीय गिरोह के छह सदस्य गिरफ्तार
हैदराबाद, 11 जून (भाषा) हैदराबाद पुलिस ने कथित तौर पर ‘उत्पाद बेचने के बहाने लोगों को जोड़ने का झांसा देकर’ वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वी सी सज्जनार ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
इस पूरी प्रक्रिया को बाजार में ‘मल्टी-लेवल मार्केटिंग’ (एमएलएम) या ‘चैन सिस्टम’ कहा जाता है, जिसमें कंपनियां कानूनी वैध व्यवसाय का मुखौटा लगाकर आती हैं, लेकिन उनका असली मकसद नए सदस्यों को जोड़कर उनसे मोटी रकम ऐंठना होता है।
सज्जनार ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हैदराबाद पुलिस ने एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
उन्होंने बताया कि ‘इग्नाइट’ नामक विदेशी संस्था की भारतीय मुखौटा कंपनी ‘इंडी कनेक्ट वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ को बढ़ावा देने के आरोप में केरल, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
शहर में दर्ज तीन प्राथमिकियों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए इन छह आरोपियों में ‘इग्नाइट’ का एक टीम लीडर/रिक्रूट्टर (सदस्य जोड़ने वाला) और ‘इंडी कनेक्ट वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के दो निदेशक शामिल हैं।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, हांगकांग में मुख्यालय वाली मल्टी-लेवल मार्केटिंग योजना ‘इग्नाइट’, तीन पूर्ववर्ती संस्थाओं ‘गोल्ड क्वेस्ट’, ‘क्वेस्टनेट’ और ‘क्यूनेट’ का ही नया रूप है। इन पुरानी संस्थाओं के खिलाफ देशभर में हजारों मामले दर्ज हैं।
उन्होंने कहा कि इसके संस्थापक पथमन सेनातिराजा को मुंबई आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी में आरोपी बनाया गया है और वह वर्तमान में ‘कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए हांगकांग में छिपा हुआ है’।
सज्जनार ने प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए बताया कि ऐसी योजनाएं प्रत्यक्ष तौर पर तो स्वास्थ्य और आहार संबंधी उत्पादों की बिक्री करती हैं, लेकिन नेपथ्य में कथित रूप से एक अवैध वित्तीय चक्र चलाती हैं, जिसमें उत्पाद की बिक्री नहीं बल्कि नए लोगों को जोड़कर उनसे पैसा ऐंठना ही मुख्य मकसद होता है।
हैदराबाद में पीड़ितों द्वारा पांच से छह जून के बीच तीन शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आरोपियों द्वारा विभिन्न माध्यमों से जोड़े जाने के बाद उनमें से प्रत्येक ने 61,639 रुपये से लेकर 63,899 रुपये तक का भुगतान किया, जो कुल मिलाकर 1.87 लाख रुपये होता है।
उन्होंने बताया कि तीनों पीड़ितों को एक ही बैंक खाते में पैसे जमा करने के निर्देश दिए गए थे, जो धन संग्रह के एक सुनियोजित और समन्वित तंत्र को दर्शाता है। तीनों ही मामलों में पीड़ितों से कथित तौर पर कहा गया था कि उनके पैसे तभी वापस किए जाएंगे जब वे ‘इग्नाइट’ में दो नए सदस्यों को जोड़ेंगे या अपने ‘इग्नाइट ई-वॉलेट’ में 200 अमेरिकी डॉलर की राशि बनाए रखेंगे।
सज्जनार ने कहा, ‘इससे यह पुष्टि होती है कि उत्पाद की खरीद तो केवल एक बहाना है, जबकि पंजीकरण शुल्क ही वास्तविक लेन-देन है। कानूनन प्रतिबंधित ‘पैसों के इस हेर-फेर’ (वित्तीय धोखाधड़ी) की मुख्य विशेषता यही होती है।’
भाषा सुमित माधव
माधव

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