श्रीनगर में एसकेआईएमएस ने हड़ताली चिकित्सा प्रशिक्षुओं को नोटिस जारी किया

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श्रीनगर में एसकेआईएमएस ने हड़ताली चिकित्सा प्रशिक्षुओं को नोटिस जारी किया

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 04:01 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 04:01 PM IST

श्रीनगर, आठ सितंबर (भाषा) एसकेआईएमएस मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने हड़ताल कर रहे चिकित्सा प्रशिक्षुओं को मंगलवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उनसे 24 घंटे के भीतर यह बताने को कहा गया है कि ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।

शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस) मेडिकल कॉलेज, बेमिना के प्राचार्य ने नोटिस में कहा, ‘‘ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो रहे सभी चिकित्सा प्रशिक्षु 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करें कि नियमों के तहत उनके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। ऐसा नहीं करने पर यह माना जाएगा कि उनके पास बचाव के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं है और मामले में लागू नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।’’

जम्मू-कश्मीर के सभी सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेज के चिकित्सा प्रशिक्षु पिछले सोमवार से हड़ताल पर हैं। वे अपने मासिक वजीफे को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं।

नोटिस में कहा गया है कि हड़ताल के कारण अस्पताल में मरीजों की देखभाल और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हुई हैं।

नोटिस में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह गंभीर अनुशासनहीनता और पेशेवर कदाचार की श्रेणी में आता है, जिसके तहत इंटर्नशिप में कटौती, अस्थायी निलंबन या यहां तक कि इंटर्नशिप रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

नोटिस में यह भी कहा गया कि प्रशिक्षुओं ने दाखिले के समय शपथ पत्र जमा किए थे, जिसमें उन्होंने अनुशासन बनाए रखने, कॉलेज के सभी नियमों और निर्देशों का पालन करने तथा किसी भी हड़ताल या अन्य अनुशासनहीन गतिविधि में शामिल नहीं होने का वादा किया था।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने चिकित्सा प्रशिक्षुओं की हड़ताल के मुद्दे पर उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर ‘‘दोहरा रवैया’’ अपनाने का आरोप लगाया।

मुफ्ती ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एसकेआईएमएस बेमिना के प्राचार्य ने वैध वजीफा बढ़ाने की मांग कर रहे चिकित्सा प्रशिक्षुओं के खिलाफ आज किसके कहने पर कार्रवाई शुरू की है? भारत एक लोकतंत्र है और हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है। आप एक बेकार शपथ पत्र के आधार पर उन्हें मजबूर नहीं कर सकते।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का यह दोहरा रवैया है। मुख्यमंत्री ने कुछ घंटे पहले ही दावा किया था कि प्रशिक्षुओं का मुद्दा आज ही सुलझा लिया जाएगा, लेकिन इसके बाद विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों के माध्यम से ये धमकी भरे पत्र जारी कर दिए गए। मुख्यमंत्री से आग्रह है कि उनका वजीफा बढ़ाया जाए।’’

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश