उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के अब तक 57 मामले सामने आये

Ads

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के अब तक 57 मामले सामने आये

  •  
  • Publish Date - August 26, 2026 / 09:23 PM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 09:23 PM IST

देहरादून, 26 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के अब तक 57 मामले सामने आए हैं और इस बीच राज्य सरकार ने अधिकारियों को सतर्कता बरतने एवं अस्पतालों में जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

प्रदेश की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक डॉ. शिखा जंगपागी ने बुधवार को बताया कि प्रदेश में मंगलवार तक इन्फ्लूएंजा ‘ए’ से पीड़ित 57 मामले सामने आए हैं जिनमें से सर्वाधिक 52 मामले देहरादून जिले में हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, नैनीताल जिले में तीन जबकि हरिद्वार जिले में दो मामले सामने आए हैं।

डॉ. जंगपागी ने कहा कि यह मानसून और जाड़ों में होने वाले सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार की तरह है जो पैरासिटामोल लेने, आराम करने और तरल खाद्य पदार्थ लेने से कुछ दिनों में स्वत: ठीक हो जाता है। उन्होंने कहा कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है और साफ-सफाई रखने से इससे बचाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि, सांस लेने में परेशानी होने जैसी समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श किया जाना चाहिए।

इस बीच, देश के कुछ राज्यों में मौसमी इन्फ्लूएंजा तथा श्वसन तंत्र से संबंधित रोगों के मामलों में वृद्धि को देखते हुए उत्तराखंड में भी सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को सतर्कता बरतने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पाण्डेय द्वारा जारी दिशानिर्देशों में कहा गया है कि सभी जिलों में इन्फ्लूएंजा तथा न्यूमोनिया रोगों के उपचार हेतु पर्याप्त पृथक बेड, आईसीयू बेड, वेंटीलेटर और आक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था सुनिश्चित रखी जाए तथा सभी अस्पतालों में चिकिस्तकों, नर्सिंग स्टाफ के अलावा आवश्यक औषधियों, पीपीई, एन-95 मास्क आदि सामग्री की उपलब्धा सुनिश्चित की जाए।

दिशानिर्देशों में चिकित्सालय एवं समुदाय स्तर पर इन्फ्लूएंजा लाइक इलनेस (आईएलआई) तथा सीवियर एक्यूट रेस्परेटरी इलनेस (एसएआरआई) लक्षणों वाले रोगियों की सघन निगरानी रखने तथा उनका विवरण अनिवार्य रूप से इन्टीग्रेटेड हेल्थ इनफार्मेशन पोर्टल (आईएचआईपी) में दर्ज करने को कहा गया है।

इसके अलावा, एसएआरआई लक्षणों से ग्रस्त रोगियों को जांच हेतु जांच केंद्रों में भेजने तथा लोगों को बचाव के प्रति जागरूकता का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

भाषा दीप्ति अमित

अमित