Social Boycott 43 Villagers: ना मिलेगा राशन…ना कुएं से भर सकेंगे पानी, पंचों ने बंद कर दिया 43 परिवारों का हुक्का-पानी, सिर्फ इस बात के लिए नाराज थे पंच

Social Boycott 43 Villagers: ना मिलेगा राशन...ना कुएं से भर सकेंगे पानी, पंचों ने बंद कर दिया 43 परिवारों का हुक्का-पानी, सिर्फ इस बात के लिए नाराज थे पंच

Modified Date: June 27, 2026 / 10:01 am IST
Published Date: June 27, 2026 10:01 am IST
HIGHLIGHTS
  • मालपुआ नहीं बनने पर बड़ा विवाद
  • 43 परिवारों का हुक्का-पानी बंद
  • कलेक्टर से न्याय की गुहार

सिरोही: Social Boycott 43 Villagers मृत्युभोज में घी के मालपुआ नहीं बनना एक परिवार को भारी पड़ गया, पंचायत ने तुगलकी फरमान सुनाते हुए पूरे परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया। इतना ही नहीं इस गरीब परिवार के समर्थन में आगे आए अन्य 42 परिवारों को भी समाज से बाहर का रास्ता दिखाते हुए सामाजिक व्यवस्थाओं से बहिष्कृत कर दिया गया है। पीड़ित परिवार ने न्याय की आस में कानून की शरण ली, लेकिन वहां से ही उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। अब पीड़ित परिवार सिरोही कलेक्ट्रेट पहुच जिलाधीश से फरियाद की हैं।

43 परिवारों का हुक्का-पानी बंद

Social Boycott 43 Villagers मिली जानकारी के अनुसार मामला सिरोही के बरलूट थाना इलाके के मंडवारिया गांव का है। पीड़ित परिवार ने कलेक्टर के सामने बताया कि गांव में 5 जून को सदाराम पुत्र बलवाजी का निधन हो गया था। 17 जून को हुए मृत्युभोज में गांव के लोगों को आमंत्रित किया था। लेकिन परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के चलते देसी घी के मालपुआ नहीं बना सका। मृतक के परिवार जनों ने ग्रामीणों व समाज को बेहद सादा भोजन कराया। बस यही बात समाज के ठेकेदारों को नागवार गुजरी और फरमान सुनाते हुए हुक्का-पानी बंद कर दिया। अब परिवार को गांव में ना कोई दुकानदार राशन दे रहा है, न ही कुएं से पानी नहीं भरने दिया जा रहा है।

पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से लगाई गुहार

पीड़ित परिवारों ने इस तुगलकी फरमान के खिलाफ स्थानीय थाने में एक दर्जन से ज्यादा पंचों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया है। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके बाद सभी परिवार न्याय की गुहार लेकर सिरोही कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं। बता दें कि “भारतीय संविधान में सामाजिक बहिष्कार दंडनीय अपराध है। राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम 2019 के तहत 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। पंचों का ये फरमान पूरी तरह गैर-कानूनी है। पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”

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