Gomutra Kharidi in UP: मिनरल वॉटर के रेट में गोमूत्र खरीदेगी भाजपा सरकार, महिला स्व सहायता समूहों को मिलेगा प्रति लीटर 2 रुपए कमीशन, पशु पालकों के लिए आई अच्छी खबर
Gomutra Kharidi in UP: मिनरल वॉटर के रेट में गोमूत्र खरीदेगी भाजपा सरकार, महिला स्व सहायता समूहों को मिलेगा प्रति लीटर 2 रुपए कमिशन, पशु पालकों के लिए आई अच्छी खबर
Gomutra Kharidi in UP: मिनरल वॉटर के रेट में गोमूत्र खरीदेगी भाजपा सरकार, महिला स्व सहायता समूहों को मिलेगा प्रति लीटर 2 रुपए कमिशन, पशु पालकों के लिए आई अच्छी खबर / Image: AI Generated
- गोमूत्र खरीद की पायलट योजना शुरू होने की बात सामने आई है
- गोमूत्र के लिए ₹10 प्रति लीटर की दर बताई गई है
- हिला स्वयं सहायता समूहों को संग्रहण के लिए ₹2 प्रति लीटर कमीशन
बुलंदशहर: Gomutra Kharidi in UP छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती सरकार ने 2 रुपए किलो में गोबर खरीदकर पूरे देश में अलग मिशाल पेश की थी। हालांकि ये योजना लंबे समय तक नहीं चल पाई और कई घोटाले सामने आने लगे। वहीं, अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक नया प्रयोग करने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने गोमूत्र खरीदने का फैसला किया है और वो भी प्रति लीटर 10 रुपए के भव से। सरका ने अपनी ये योजना पायलट प्रोजेक्टर के तौर पर बुलंदशहर जिले में लागू भी कर दिया है।
गोमूत्र खरीदी कर रही सरकार
Gomutra Kharidi in UP मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने बुलंदशहर जिले के स्याना तहसील के 15 गांवों में गोमूत्र खरीद की योजना प्रारंभ की है। सरकारी अधिकारियों की मानें तो फिलहाल 10 रुपए प्रति लीटर की दर से गोमूत्र की खरीदी की जाएगी और बाद में कीमत 20 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाया जा सकता है। कहा ये भी जा रहा है कि अगर योजना सफल हुई तो आगे पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जा सकता है।
10 रुपए के भाव से रोजाना 500 लीटर की हो रही खरीदी
बताया जा रहा है कि फिलहाल रोजाना 500 लीटर गोमूत्र की खरीदी की जा रही है, जिसके लिए सभी 15 गांवों में 200 लीटर के टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को अपना उत्पाद बेचने के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती और गांव में ही खरीद की सुविधा मिल जाती हैं स्थानीय स्तर पर यह व्यवस्था उपलब्ध होने से ग्रामीणों और विशेषकर महिलाओं को इस योजना से जोड़ना काफी आसान हो गया है।
महिला स्व सहायता समूह को मिलेगा 2 रुपए कमिशन
इस पूरे आर्थिक मॉडल में ग्रामीण महिलाओं की सबसे अहम भूमिका तय की गई है। लगभग 300 महिलाओं को इस पहल से जोड़कर शेयरहोल्डर बनाया गया है। गोमूत्र के संग्रहण में सहयोग करने पर महिलाओं को प्रति लीटर दो रुपए का कमीशन दिया जा रहा है। यह व्यवस्था महिलाओं के लिए गांव में रहते हुए ही नियमित और अतिरिक्त आय का एक नया साधन बन रही है।
भविष्य में पूरे प्रदेश में लागू होगी योजना
एकत्रित किए गए गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर खेती के लिए उपयोगी और केमिकल-मुक्त दवाएं तैयार की जा रही हैं। तैयार उत्पादों को समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, यह मॉडल रासायनिक उत्पादों का विकल्प देने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देगा। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर इसका विस्तार पूरे प्रदेश में किया जाएगा।
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