सोशल मीडिया कंपनियों को अधिक जवाबदेह बनाया जाए: राज्यसभा में मिलिंद देवरा ने की मांग
सोशल मीडिया कंपनियों को अधिक जवाबदेह बनाया जाए: राज्यसभा में मिलिंद देवरा ने की मांग
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) राज्यसभा में शिवसेना के सदस्य मिलिंद मुरली देवरा ने मंगलवार को सरकार से सोशल मीडिया कंपनियों को अधिक जवाबदेह बनाने की मांग करते हुए कहा कि डिजिटल मंचों का किशोरों पर नकारात्मक प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए देवरा ने बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया तथा इंटरनेट के उपयोग के प्रभाव को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने गाजियाबाद में हाल ही में तीन किशोर बहनों की आत्महत्या की घटना का भी उल्लेख किया, जिसे कथित तौर पर ऑनलाइन खेल की लत से जोड़ा जा रहा है।
देवरा ने कहा कि सोशल मीडिया दुनिया भर में अरबों लोगों को जोड़ता है, आवाजों को सामने लाता है और सूचना को अधिक लोकतांत्रिक बनाता है, लेकिन इसका एक “स्याह पक्ष” भी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि 2010 के आसपास, जब एक प्रमुख सोशल मीडिया मंच ने युवाओं को आक्रामक तरीके से लक्षित करना शुरू किया, तब से किशोरों में अवसाद और आत्महत्या के मामलों में तेज वृद्धि देखी गई।
देवरा के अनुसार, भारत में करीब 27 प्रतिशत किशोरों में सोशल मीडिया की लत के लक्षण दिखते हैं, जिससे पढ़ाई में गिरावट, चिंता और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। उन्होंने एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि देश के बड़े शहरों में लगभग 33 प्रतिशत बच्चे साइबर उत्पीड़न का सामना करते हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का भी उल्लेख किया, जिनके अनुसार किशोरों द्वारा किए जाने वाले हिंसक अपराध 2016 में 32 प्रतिशत थे और बढ़कर 2022 में लगभग 50 प्रतिशत हो गये हैं।
देवरा ने कहा कि कई देशों ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कदम उठाए हैं। फ्रांस, आस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने किशोरों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है, जबकि स्पेन और जर्मनी भी इस दिशा में कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हाल में नई दिल्ली में आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाव शिखर सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया की पहुंच सीमित करने पर विचार करने का आग्रह किया था।
देवरा ने कहा कि भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण ढांचे में पहले से ही 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावकों की सत्यापित सहमति जैसी कड़ी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन इसके बावजूद सोशल मीडिया कंपनियों को और अधिक जवाबदेह बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक समेत कई राज्यों में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू होना उत्साहजनक है। साथ ही उन्होंने स्कूलों के पाठ्यक्रम में डिजिटल साक्षरता और मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
देवरा ने कहा कि बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग की निगरानी करना और उनसे खुलकर संवाद करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा, “एक छोटे बच्चे के अभिभावक के रूप में मैं सदन और सरकार से आग्रह करता हूं कि बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें तुरंत और निर्णायक कदम उठाने चाहिए।”
भाषा
मनीषा वैभव
वैभव

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