स्टेंस हत्याकांड: न्यायालय ने ओडिशा सरकार को दारा सिंह की सजा में कटौती पर निर्णय लेने को कहा

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स्टेंस हत्याकांड: न्यायालय ने ओडिशा सरकार को दारा सिंह की सजा में कटौती पर निर्णय लेने को कहा

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 06:11 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 06:11 PM IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ओडिशा सरकार को आस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेंस और उनके दो नाबालिग बेटों की 1999 में की गई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रवींद्र पाल उर्फ दारा सिंह की सजा में कटौती करने से जुड़ी अर्जी पर फैसला करने का निर्देश देते हुए कहा कि ‘‘आप इस मामले को ऐसे ही लटकाए नहीं रख सकते।’’

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने इस बात पर चिंता जताई कि राज्य सरकार ने न्यायालय को यह जानकारी नहीं दी कि सिंह की सजा में कटौती करने की अर्जी पर कोई फैसला लिया गया है या नहीं।

पीठ ने कहा, ‘‘अगर आप इसे खारिज करना चाहते हैं, तो कर दीजिए। आप निर्णय लीजिए। हम इसे देख लेंगे। आप इसे इस तरह लटकाए नहीं रख सकते।’’

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने पीठ को बताया कि मामले में सुनवाई टालने के लिए एक पत्र भेजा गया है, क्योंकि ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ बीमार हैं।

इस मामले में 19 अगस्त को दिए गए अपने आदेश का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा कि उसने राज्य की सजा समीक्षा बोर्ड को निर्णय लेने और न्यायालय को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया था।

पीठ ने कहा, ‘‘पिछली बार भी अर्जी पर निर्णय लेने के लिए समय दिया गया था। आप हमें निर्णय से अवगत कराएं।’’ साथ ही, पीठ ने कहा कि न्यायालय ने अपने 19 अगस्त के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि प्राधिकार सजा में कटौती की अर्जी पर निर्णय ले।

पीठ ने कहा, ‘‘आप निर्णय लेने से बच नहीं सकते। आप दो साल से इस मामले को टाल रहे हैं। हां या ना में कोई निर्णय लें।’’

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई 17 सितंबर को तय की जाए।

पीठ ने कहा, ‘‘हम अगली तारीख पर इसे नहीं टालेंगे। आप निर्णय लेकर हमें बताएं, अन्यथा हम आपके अधिकारी को तलब करेंगे।’’

न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की और प्रतिवादी को निर्देश दिया कि वह 19 अगस्त के आदेश के तहत लिए गए फैसले के बारे में शीर्ष अदालत को सूचित करे।

मामले की 19 अगस्त को सुनवाई के दौरान, उच्चतम न्यायालय ने सिंह की सजा में कटौती की अर्जी पर फैसला न लेने के लिए ओडिशा सरकार को फटकार लगाई थी।

यह उल्लेख किया गया था कि सिंह की सजा में कटौती की अर्जी पर प्राधिकार को निर्णय लेने का मौका देने के लिए मामले को बार-बार टाला गया। 63 वर्षीय सिंह 26 साल से अधिक समय से जेल में है।

सिंह ने 2024 में शीर्ष अदालत का रुख करते हुए समय पूर्व रिहाई की मांग की थी। उसने दलील दी कि वह जेल में 24 साल से अधिक समय से कैद है और अपने कृत्य को लेकर पछतावा जता चुका है।

क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में 22-23 जनवरी 1999 की दरमियानी रात को, सिंह की अगुवाई वाली भीड़ ने स्टेंस और उनके दो बेटों — फिलिप (11) और टिमोथी (8) — पर उस समय हमला किया, जब वे सो रहे थे। भीड़ ने गाड़ी में आग लगा दी।

तिहरे हत्याकांड मामले के मुख्य आरोपी सिंह को 2003 में सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया और मौत की सजा सुनाई थी।

ओडिशा उच्च न्यायालय ने 2005 में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया और 2011 में उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखा।

शीर्ष अदालत से दया की गुहार लगाते हुए सिंह ने कहा कि वह ‘‘सेवा-भाव वाले कामों’’ के जरिए समाज की सेवा करेगा।

सिंह का साथी महेंद्र हेम्ब्रम भी इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। सबूतों के अभाव के कारण उच्च न्यायालय ने 11 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।

स्टेंस और उनकी पत्नी ग्लैडिस मयूरभंज इवेंजेलिकल मिशनरी संस्था के साथ काम करते थे और कुष्ठ रोगियों की देखभाल करते थे।

ग्लैडिस स्टेंस, जिन्हें 2005 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था, ने कहा कि उन्होंने अपने पति और बेटों के हत्यारों को माफ कर दिया है और उनके मन में उनके प्रति कोई कड़वाहट नहीं है।

भाषा सुभाष माधव

माधव