प्रसिद्धि से दूर रहकर सेवा कार्य करें : भागवत

प्रसिद्धि से दूर रहकर सेवा कार्य करें : भागवत

प्रसिद्धि से दूर रहकर सेवा कार्य करें : भागवत
Modified Date: April 8, 2023 / 09:09 pm IST
Published Date: April 8, 2023 9:09 pm IST

जयपुर, आठ अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने प्रसिद्धि से दूर रहकर सेवा कार्य करने पर जोर देते हुए शनिवार को कार्यकर्ताओं से कहा कि सात्विक सेवा के पीछे अहंकार नहीं होता है।

डॉ. भागवत जयपुर के जामडोली स्थित केशव विद्यापीठ में चल रहे सेवा संगम के दूसरे दिन देशभर से आए सेवा भारती के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।

प्रसिद्धि से दूर रहकर सेवा कार्य करने पर बल देते हुए भागवत ने कहा, ‘‘सेवा करते हैं तो अपने आप प्रसिद्धि मिलती है, लेकिन उस ओर ध्यान नहीं देना है। सात्विक सेवा के पीछे अहंकार नहीं होता है।’’ उन्‍होंने कहा, ‘‘कई बार छोटी- छोटी बातों से बड़ी बातें बनती हैं। सात्विक प्रकृति का हमारा कार्य है, इसलिए सात्विक कार्यकर्ता बनाने पड़ेंगे। ऐसा करने में अहंकार आड़े नहीं आने देना है। पूरे उत्साह से कार्य करते हुए मन, वाणी और शरीर का तप हमें करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सेवा में उग्रता नहीं सौम्यता चाहिए। ज्यादा बड़बोलापन काम का नहीं है।’’

संगठित कार्य शक्ति की महत्ता पर जोर देते हुए उन्‍होंने कहा कि हम विश्व मंगल साधना के मौन पुजारी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘संगठित कार्य शक्ति हमेशा विजयी रहती है। हम विश्व मंगल साधना के मौन पुजारी हैं। इसके लिए सामर्थ्य-सम्पन्न संघ शक्ति चाहिए, क्योंकि अच्छा कार्य भी बिना शक्ति के कोई मानता नहीं है, कोई देखता नहीं है। यह विश्व का स्वभाव है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘संघ की प्रेरणा से स्वयंसेवकों ने सेवा कार्य किए। इनसे ही ‘सेवा भारती’ का जन्म हुआ। सेवा का कार्य सात्विक होता है। फल की इच्छा नहीं रखकर किए जाने वाले कार्य सात्विक होते हैं। जो कार्य स्वार्थवश किए जाते हैं वे राजसी कार्य होते हैं। तामसिक कार्य भी होते हैं। ऐसा करने वाले अपना भी भला नहीं करते और दूसरों का भी नुकसान करते हैं। सेवा का लाभ सेवित और सेवक दोनों को होता है। सेवक निस्वार्थ बुद्धि से सेवा करते हैं।’’

एक बयान के अनुसार, निस्वार्थ सेवा पर बल देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘कार्यकर्ता कार्य के स्वभाव के साथ तन्मय होता है, तब कार्य होता है। कार्य के अनुरूप कार्यकर्ता हो, ऐसी समझ हमें विकसित करनी है। सेवा कार्य मन की तड़प से होते हैं। हमें विश्व मंगल के लिए काम करना है। इसलिए काम करने वालों का बड़ा समूह खड़ा करना है।’’

सेवा भारती के इस तीन दिवसीय संगम में देश भर से 800 से अधिक स्वैच्छिक सेवा संगठनों के हजारों प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

भाषा पृथ्‍वी अर्पणा

अर्पणा


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