ऑटिज्म के इलाज के लिए ‘स्टेम सेल’ थेरेपी अवैध: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग

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ऑटिज्म के इलाज के लिए ‘स्टेम सेल’ थेरेपी अवैध: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग

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  • Publish Date - March 26, 2026 / 07:36 PM IST,
    Updated On - March 26, 2026 / 07:36 PM IST

नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में ‘ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर’ के उपचार के लिए ‘स्टेम सेल थेरेपी’ को अवैध घोषित करते हुए एक परामर्श जारी किया है।

सूत्रों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य महानगरों और टियर-2 शहरों में स्थित उन निजी क्लीनिकों के अवैध तौर-तरीकों पर अंकुश लगाना है, जो ‘स्टेम सेल थेरेपी’ के माध्यम से ‘ऑटिज्म’ और ‘सेरेब्रल पाल्सी’ का इलाज करने का दावा करते हैं।

‘स्टेम सेल थेरेपी’ एक आधुनिक चिकित्सा तकनीक है, जिसमें शरीर की खास कोशिकाओं का उपयोग बीमार या क्षतिग्रस्त ऊतकों को ठीक करने या बदलने के लिए किया जाता है।

सभी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों और पंजीकृत चिकित्सकों को 25 मार्च को जारी परामर्श के अनुसार, ‘स्टेम सेल थेरेपी’ का उपयोग अब केवल 32 अनुमोदित रोगों के लिए किया जा सकता है, जिनमें ‘एक्यूट मायलोइड ल्यूकेमिया’, ‘मल्टीपल स्केलैरोसिस’, ‘थैलेसीमिया’, ‘ऑस्टियोपेट्रोसिस’, ‘मल्टीपल मायलोमा’, ‘एप्लास्टिक एनीमिया/पैरोक्सिस्मल हीमोग्लोबिनुरिया’, ‘जर्म सेल ट्यूमर’ और ‘मायलोफाइब्रोसिस’ शामिल हैं।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की सिफारिशों के आधार पर यह परामर्श जारी किया गया है।

उच्चतम न्यायालय ने 30 जनवरी को हुई सुनवाई में ‘स्टेम सेल थेरेपी’ के संबंध में फैसला सुनाया था जिसके बाद आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने 10 मार्च को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अभिजात शेथ को पत्र लिखकर 32 ऐसी बीमारियों की सूची साझा की, जिनमें स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश