नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में आगामी सर्दियों के दौरान प्रदूषण से निपटने के लिए कई उपायों को अंतिम रूप दे दिया गया है। इनमें दफ्तरों के समय में बदलाव, वाहनों और उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन पर रोक तथा धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर पाबंदी शामिल हैं।
यह फैसला दिल्ली की वायु प्रदूषण रोकथाम कार्य योजना की समीक्षा के लिए सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार के अन्य मंत्री शामिल हुए।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘लक्ष्य-आधारित इस रणनीति के तहत वाहनों के धुएं, सड़कों और निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल, कचरा व सूखे पत्ते व लकड़ी जलाने, औद्योगिक उत्सर्जन, सार्वजनिक परिवहन, हरियाली बढ़ाने और अत्यधिक प्रदूषण व यातायात वाले स्थलों (हॉटस्पॉट) पर कार्रवाई तेज की जाएगी।’
योजना के अनुसार, जन प्रतिनिधि अधिकारियों, आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन), व्यापारियों और यातायात पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली के ऐसे प्रमुख स्थलों का नियमित रूप से दौरा करेंगे।
अब तक 42 ऐसे स्थानों (हॉटस्पॉट) पर स्थिति में सुधार किया गया है, जबकि अक्टूबर में आठ और स्थानों का काम पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, दिल्ली यातायात पुलिस की सलाह से इन जगहों पर जाम से निपटने के लिए एक तरफा (वन वे) यातायात और अन्य प्रयोग किए जाएंगे।
सरकार ने 2026 में 3,065 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य रखा था, जिसमें से 1,193 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है।
अधिकारी के अनुसार, औद्योगिक प्रदूषण को रोकने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से लैस नियंत्रण केंद्र चालू करने, निगरानी केंद्रों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 करने और नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए 334 विशेष टीम तैनात करने का फैसला किया गया है।
भाषा सुमित अविनाश
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