परिजनों से छिपाकर दिल्ली पहुंचे छात्र तंबू में रहकर जंतर-मंतर पर कर रहे हैं आंदोलन

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परिजनों से छिपाकर दिल्ली पहुंचे छात्र तंबू में रहकर जंतर-मंतर पर कर रहे हैं आंदोलन

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  • Publish Date - July 24, 2026 / 01:22 PM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 01:22 PM IST

( अहेली दास )

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) सत्रह वर्षीय यश कुमार ने अपने माता-पिता से कहा कि वह अभी भी कोटा में है, जबकि 16 वर्षीय मीना ने घरवालों को बताया कि वह एक मित्र के जन्मदिन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रही है।

लेकिन दोनों राजधानी पहुंचकर जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के समर्थन में चल रहे आंदोलन में शामिल हो गए।

ये उन अनेक छात्रों में शामिल हैं, जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने आंदोलन में भाग लेने की बात अपने परिवारों से छिपाई, क्योंकि उनका मानना है कि यह संघर्ष जोखिम उठाने के लायक है।

इस आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, राजनीतिक दलों और नागरिकों का समर्थन मिला है, लेकिन इसका मुख्य आधार वे छात्र हैं, जो इसे देश की शिक्षा व्यवस्था के भविष्य की लड़ाई बता रहे हैं।

बिहार के मूल निवासी और कोटा में 12वीं कक्षा के छात्र यश कुमार ने कहा कि छात्रों से हमेशा कहा जाता है कि वे केवल पढ़ाई पर ध्यान दें और बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘जब छात्र डॉक्टर, इंजीनियर या शिक्षक बनने के लिए वर्षों मेहनत करते हैं और उसके बाद सरकार से बार-बार गलतियां होती हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को ही उठाना पड़ता है।’’

यश ने कहा कि न तो उनके माता-पिता और न ही उनके मित्रों को दिल्ली आने का वास्तविक कारण पता है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे माता-पिता को लगता है कि मैं अभी भी कोटा में हूं और मेरे दोस्त समझते हैं कि मैं अपने भाई से मिलने दिल्ली आया हूं।’’

आंदोलन में शामिल कई छात्रों की ऐसी ही कहानियां सामने आई हैं, जिन्होंने परिवार के विरोध से बचने के लिए अपनी भागीदारी की जानकारी घरवालों से छिपाई।

इन्हीं में 16 वर्षीय मीना भी शामिल है, जो केवल अपना पहला नाम बताती है और वर्ष 2028 में नीट परीक्षा देने की तैयारी कर रही है।

उत्तर प्रदेश की रहने वाली और फिलहाल मुंबई में अपने दादा-दादी के साथ रह रही मीना ने बताया कि वह बचपन की एक मित्र के बुलावे पर दिल्ली आई।

उसने कहा, ‘‘मैंने दादा-दादी से कहा कि मैं अपनी दोस्त के जन्मदिन में शामिल होने दिल्ली जा रही हूं। पहले वे तैयार नहीं थे, लेकिन किसी तरह मैंने उन्हें मना लिया।’’

मीना के अनुसार, यह आंदोलन उन छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए है, जिन्हें आने वाले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं का सामना करना है। उसने कहा, ‘‘एक समय ऐसा आता है जब छात्र केवल किताबों के पीछे नहीं छिप सकते और दूसरों के फैसलों का इंतजार नहीं कर सकते। यह हमारा भविष्य है और बहुत देर होने से पहले हमें इसके लिए लड़ना होगा।’’

उसने कहा, ‘‘इस वर्ष प्रश्नपत्र लीक हुआ है। अगर अगले वर्ष या उसके अगले वर्ष, जब मैं परीक्षा दूंगी, तब भी ऐसा हुआ तो क्या होगा?’’

जंतर-मंतर पर मुख्य मंच के पीछे कई छात्रों ने अस्थायी तंबू लगा रखे हैं और बारिश तथा अन्य कठिन परिस्थितियों के बावजूद कई दिनों से वहीं रह रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के रहने वाले 19 वर्षीय मयंक पसरीचा ने कहा कि वह जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन शुरू करने के बाद से आंदोलन स्थल पर ही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं सोनम वांगचुक के अनशन शुरू होने के बाद से यहां हूं। 20 जुलाई को पुलिस कार्रवाई के दौरान मैंने गुरुद्वारा बंगला साहिब में शरण ली थी।’’

पसरीचा ने कहा कि उनका परिवार उनके आंदोलन में शामिल होने के फैसले के पक्ष में नहीं था, लेकिन बाद में उसने यह स्वीकार कर लिया कि उसे रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां अकेला आया था, लेकिन यहां मुझे बहुत अच्छे दोस्त मिले हैं। सभी ने सहयोग किया है। सभी के लिए भोजन की व्यवस्था है और गुरुद्वारे से भी हमें मदद मिली।’’

जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ रहा है, सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर दिल्ली पहुंचे, परिवारों से अपनी योजना छिपाने वाले और अस्थायी तंबुओं में रह रहे इन छात्रों की कहानियां इस आंदोलन का प्रतीक बनती जा रही हैं। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था के भविष्य की है।

यह आंदोलन जून के अंत में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) के सदस्यों के अनिश्चितकालीन अनशन के साथ शुरू हुआ था। उनकी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी।

आंदोलन को बाद में विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन मिला। 20 जुलाई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के आह्वान पर ‘संसद मार्च’ निकाला गया, जिसमें सैकड़ों प्रदर्शनकारी शामिल हुए।

यह प्रदर्शन दिल्ली पुलिस के साथ टकराव में समाप्त हुआ। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया गया। इस दौरान कई छात्र घायल हुए और कुछ को हिरासत में लिया गया, दिल्ली पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया।

भाषा मनीषा माधव

माधव