एलपीजी आयात पर निर्भरता घटाने के लिए इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देने की सलाह : विशेषज्ञ
एलपीजी आयात पर निर्भरता घटाने के लिए इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देने की सलाह : विशेषज्ञ
(अलिंद चौहान)
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भारत को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति प्रभावित होने के बीच विशेषज्ञों ने देश खासतौर से शहरी क्षेत्रों में रसोई गैस पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बिजली से खाना पकाने (इलेक्ट्रिक कुकिंग) के उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ाने की सलाह दी है।
‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलेपमेंट’ (आईआईएसडी) के एक विश्लेषण के अनुसार, यदि शहरी घरों में से 60 प्रतिशत (उच्च-विकास परिदृश्य में) मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाते हैं, तो एलपीजी आयात आधे से अधिक कम हो सकता है।
हालांकि, बड़े पैमाने पर इसे अपनाने के लिए उच्च उपकरण लागत, खान-पान की आदतों में बदलाव और सीमित बिजली आपूर्ति जैसी बाधाओं को दूर करना होगा।
एलपीजी आयात पर उच्च निर्भरता का कारण :
वर्तमान में भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरत आयात करता है। कुल खपत करीब 3.3 करोड़ टन है, जिसमें घरेलू उत्पादन लगभग 1.3 करोड़ टन यानी 40 प्रतिशत है।
आईआईएसडी के नीति सलाहकार सुनील मणि ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘भारत में एलपीजी उत्पादन कच्चे तेल के शोधन और प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण से जुड़ा है, जहां यह एक उप-उत्पाद होता है। इसलिए इसका उत्पादन सीमित रहता है और रिफाइनरी कुल उत्पादन का केवल एक से 4.2 प्रतिशत ही एलपीजी के रूप में देती है।’’
उन्होंने कहा कि रिफाइनरी केवल एलपीजी उत्पादन पर केंद्रित नहीं हो सकती, क्योंकि उसका मुख्य उद्देश्य पेट्रोल और डीजल बनाना होता है। इसी कारण भारत अपनी लगभग दो-तिहाई एलपीजी जरूरत आयात करता है और चीन के बाद दुनिया के बड़े आयातकों में शामिल है। इससे देश वैश्विक आपूर्ति बाधाओं, भू-राजनीतिक तनाव और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बन जाता है।
इलेक्ट्रिक कुकिंग के फायदे :
इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाने से न केवल एलपीजी आयात निर्भरता घटेगी, बल्कि सरकारी सब्सिडी खर्च भी कम होगा।
मणि ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सब्सिडी 2024-25 में लगभग 13,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष से 31 प्रतिशत अधिक है…इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देने से वित्तीय घाटा भी कम होगा।’’
सरकार तेल विपणन कंपनियों को होने वाले घाटे की भरपाई भी करती है, जो इलेक्ट्रिक कुकिंग बढ़ने से कम हो सकती है।
आईआईएसडी के अनुसार, इलेक्ट्रिक कुकिंग 15-20 प्रतिशत तक सस्ती है क्योंकि इसकी दक्षता 80-85 प्रतिशत है, जबकि एलपीजी की केवल 57 प्रतिशत।
मणि ने कहा, ‘‘इसका मतलब यह है कि इलेक्ट्रिक कुकिंग के मामले में आप भोजन पकाने में जितनी ऊर्जा खर्च करते हैं, उसका 85 प्रतिशत तक हिस्सा वास्तव में भोजन को गर्म करने में खर्च होता है। पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कुकिंग करने वाले परिवार का वार्षिक खर्च लगभग 5,800 से 5,900 रुपये होगा। एलपीजी की मौजूदा कीमत (60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद) पर केवल एलपीजी का उपयोग करने पर 7,300 रुपये का खर्च आएगा, जिससे इलेक्ट्रिक कुकिंग लगभग 20 प्रतिशत सस्ती हो जाएगी।’’
चुनौतियां और समाधान :
सबसे बड़ी चुनौती सरकार की ओर से पर्याप्त पहल का अभाव है। ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) में ऊर्जा और पर्यावरण मुद्दों पर विशेषज्ञ शोधार्थी कार्तिक गणेशन ने कहा, ‘‘फिलहाल, हम उद्योग को पर्याप्त संकेत भी नहीं दे रहे हैं। उदाहरण के लिए मांग बढ़ने के कारण अमेज़न और फ्लिपकार्ट के पास इंडक्शन हीटर खत्म हो गए हैं। रक्षा खरीद की तरह ही हमें संकट आने से पहले ही उद्योग को आपूर्ति के लिए तैयार करना होगा।’’
उन्होंने सुझाव दिया कि शुरुआत शहरी समृद्ध वर्ग से हो सकती है, जो पहले से ही माइक्रोवेव और पानी गर्म करने वाली केतली इस्तेमाल करते हैं। इससे गरीब उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी उपलब्ध रह सकेगी।
बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता भी एक बड़ी चुनौती है, इसलिए विशेषज्ञों ने पहले शहरी क्षेत्रों में चरणबद्ध विस्तार की सिफारिश की है।
गणेशन ने कहा कि सरकार उज्ज्वला योजना की तरह मॉडल अपनाकर उपकरण उपलब्ध करा सकती है और आसान किस्तों में भुगतान की सुविधा दे सकती है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को सब्सिडी लागत और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा।
भाषा गोला नरेश
नरेश

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