Sumit Sarkar Passes Away: नहीं रहे प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार, 87 साल की उम्र में निधन
Sumit Sarkar Passes Away: नहीं रहे प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार, 87 साल की उम्र में निधन

Sumit Sarkar Passes Away: नहीं रहे प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार, 87 साल की उम्र में निधन /image: Social Media
- प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार का 87 वर्ष की उम्र में निधन
- आधुनिक भारतीय इतिहास, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन पर उनके शोध को विशेष पहचान मिली
- ‘द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल’ और ‘मॉडर्न इंडिया: 1885-1947’ समेत कई महत्वपूर्ण किताबें लिखीं
नई दिल्ली। Sumit Sarkar Passes Away: प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार का बृहस्पतिवार को दिल्ली स्थित उनके आवास पर उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। इतिहासकार और पारिवारिक मित्र जी. अरुणिमा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को यह जानकारी दी। वह 87 वर्ष के थे।
अरुणिमा ने कहा, ‘‘प्रोफेसर सरकार लंबे समय से अस्वस्थ थे, लेकिन कुछ समय से वह उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। कुछ साल पहले वह गिर गए थे और उसके बाद से वह बाहर नहीं आते-जाते थे।’’
सुमित सरकार के परिवार में उनकी पत्नी और इतिहासकार तनिका सरकार तथा बेटे आदित्य सरकार हैं। आदित्य वारविक विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को किए जाने की संभावना है। इसकी निश्चित तारीख और समय की जानकारी बाद में दी जाएगी।
कोलकाता से दिल्ली विश्वविद्यालय तक का सफर (Sumit Sarkar Biography)
Sumit Sarkar Passes Away इतिहासकार सुशोभन सरकार के घर 1939 में जन्मे सुमित सरकार ने कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज और कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास की पढ़ाई की थी। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय में व्याख्याता और बर्दवान विश्वविद्यालय में रीडर के रूप में अध्यापन कार्य शुरू किया। इतिहास के प्रोफेसर के रूप में उनका सबसे लंबा कार्यकाल दिल्ली विश्वविद्यालय में रहा।
इन किताबों ने दिलाई अलग पहचान (Sumit Sarkar Books)
उनकी कई महत्वपूर्ण कृतियों में ‘द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल’, ‘मॉडर्न इंडिया: 1885-1947’ और ‘राइटिंग सोशल हिस्ट्री’ शामिल हैं और इन कृतियों ने उन्हें उपनिवेशवाद, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन के अध्ययन में एक प्रामाणिक इतिहासकार के रूप में स्थापित किया।
मार्क्सवादी इतिहासकार के रूप में बनाई पहचान (Historian Sumit Sarkar)
Sumit Sarkar Passes Away मार्क्सवादी इतिहासकार के रूप में पहचाने जाने वाले सुमित सरकार स्वदेशी आंदोलन पर अपने शोध और भारतीय राष्ट्रवाद के पारंपरिक नेतृत्व-केंद्रित दृष्टिकोण को चुनौती देने के लिए जाने जाते थे। वह ‘सबऑल्टर्न स्टडीज कलेक्टिव’ के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे, हालांकि बाद में उन्होंने इसकी आलोचना भी की।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर उनके योगदान के लिए उन्हें 2003 में इंडियन हिस्ट्री एंड कल्चर सोसाइटी की ओर से सरित चटर्जी स्मृति पुरस्कार दिया गया। इसके अगले वर्ष उन्हें अपनी पुस्तक ‘राइटिंग सोशल हिस्ट्री’ के लिए रवींद्र पुरस्कार मिला था, जिसे उन्होंने 2007 में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन माकपा नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार द्वारा किसानों के साथ किए गए व्यवहार के विरोध में लौटा दिया था। उनके निधन पर पाठकों और इतिहासकारों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी।
सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का दौर
अरुणिमा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘अलविदा सुमित। प्रोफेसर सुमित सरकार, इतिहासकारों में अग्रणी और बेहद संवेदनशील इंसान, अब हमारे बीच नहीं रहे। आधुनिक भारतीय इतिहास में उनका योगदान अतुलनीय है।’’
राज्यसभा सदस्य मनोज कुमार झा ने सुमित सरकार को गांधी की गहरी समझ रखने वाले इतिहासकार के रूप में याद किया।
उन्होंने लिखा, ‘‘आपकी गांधी की उस समझ को कैसे भुलाया जा सकता है कि गांधी हर किसी को एक जैसा सोचने के लिए मजबूर नहीं करते थे, बल्कि ऐसा नेतृत्व तैयार करते थे जिसमें अलग-अलग विचार रखने वाले लोग भी साथ संघर्ष कर सकते थे। आपके काम की तरह यह विचार आज भी प्रासंगिक है।’’
लेखिका नीलांजना रॉय ने सुमित सरकार को ‘‘बहुलवाद में विश्वास रखने वाला और दृढ़ता से फासीवाद विरोधी’’ इतिहासकार बताया।
प्रकाशक अर्पिता दास ने ‘एक्स’ पर लिखा कि सुमित सरकार अपने एमए के छात्रों को अम्बर्टो इको की पुस्तक ‘द नेम ऑफ द रोज’ पढ़ने की सलाह देते थे।
उन्होंने लिखा, ‘‘ मुझे याद है कि जिस तरह वह हमारी बातों को समझाते थे और हमारे सवालों का जवाब देते हुए हमें स्रोतों के आधार पर तार्किक समझ की ओर ले जाते थे, वह अद्भुत था। इसके बावजूद वह कहते थे कि इतिहास पढ़ते हुए अपनी कल्पना को खत्म नहीं होने देना चाहिए। मुझे सौभाग्य मिला कि मैंने उन्हें और तनिका दी दोनों को पढ़ा। आज मेरे सभी विचार उनके साथ हैं। उनका साथ कितना अद्भुत था।’’
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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः
उत्तर: सुमित सरकार भारत के प्रख्यात इतिहासकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व इतिहास प्रोफेसर थे। आधुनिक भारतीय इतिहास और राष्ट्रवाद पर उनके शोध के लिए उन्हें विशेष रूप से जाना जाता था।
लेखक के बारे में
सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.
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