हरियाणा के अगले मुख्य सचिव के लिए सुमिता मिश्रा और सुधीर राजपाल प्रमुख दावेदार
हरियाणा के अगले मुख्य सचिव के लिए सुमिता मिश्रा और सुधीर राजपाल प्रमुख दावेदार
चंडीगढ़, सात जून (भाषा) हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का सेवा-विस्तार 30 जून को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में 1990 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों सुमिता मिश्रा और सुधीर राजपाल को उनके उत्तराधिकारी के रूप में प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
सुमिता मिश्रा वर्तमान में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में वित्तीय आयुक्त हैं जबकि सुधीर राजपाल अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के पद पर कार्यरत हैं।
सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारी राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
पूर्व में हालांकि यह देखा गया है कि राज्य के शीर्ष नौकरशाही पद पर नियुक्ति हमेशा केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं की गई है।
पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को एक वर्ष का सेवा-विस्तार प्रदान किया था। उनका कार्यकाल 30 जून, 2025 को समाप्त होना था। रस्तोगी 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
फरवरी 2025 में हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने रस्तोगी को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया था।
रस्तोगी को मुख्य सचिव का पद उस समय मिला था जब 1989 बैच के आईएएस अधिकारी एवं तत्कालीन मुख्य सचिव विवेक जोशी निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किए गए थे। जोशी की नियुक्ति के लगभग तीन महीने बाद रस्तोगी ने यह जिम्मेदारी संभाली थी। पिछले वर्ष हरियाणा के आईएएस अधिकारियों की वरिष्ठता सूची के अनुसार, वरिष्ठता के आधार पर सुधीर राजपाल सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे। उनके बाद सुमिता मिश्रा, अनुराग रस्तोगी और दो अन्य आईएएस अधिकारी थे। राजपाल नवंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जबकि मिश्रा जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगी।
हरियाणा की प्रशासनिक व्यवस्था में वित्तायुक्त (राजस्व) का पद राज्य नौकरशाही में दूसरा सबसे वरिष्ठ पद माना जाता है।
अतीत में कई अवसरों पर सरकार ने वित्तायुक्त (राजस्व) के पद पर कार्यरत अधिकारी को मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नत किया है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का कार्यभार संभाल रहीं सुमिता मिश्रा को सरकार ने लगातार महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं, विशेषकर उन अवधियों में जब बड़े नीतिगत क्रियान्वयन और संस्थागत सुधारों की आवश्यकता रही।
इससे पहले, गृह विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश के तीन नए आपराधिक कानूनों को हरियाणा में लागू करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसे हाल के वर्षों में राज्य सरकारों द्वारा किए गए सबसे जटिल प्रशासनिक कार्यों में से एक माना गया।
पुलिस, अभियोजन, जेल प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से हरियाणा उन शुरुआती राज्यों में शामिल रहा, जिन्होंने इन सुधारों को प्रभावी रूप से लागू किया।
उनके कार्यकाल में प्रौद्योगिकी आधारित सुशासन पर भी विशेष जोर दिया गया। उनके नेतृत्व में शुरू की गई कई डिजिटल पहलों का उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाना, प्रक्रियागत देरी कम करना और जवाबदेही को मजबूत करना रहा है।
वहीं, हाल के वर्षों में सुधीर राजपाल ने भी कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। इनमें विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव, नागरिक उड्डयन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद शामिल हैं।
भाषा रवि कांत प्रशांत
प्रशांत

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