तुलु को कर्नाटक की दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की पहल का समर्थन

तुलु को कर्नाटक की दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की पहल का समर्थन

तुलु को कर्नाटक की दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की पहल का समर्थन
Modified Date: March 4, 2026 / 10:39 pm IST
Published Date: March 4, 2026 10:39 pm IST

मंगलुरु (कर्नाटक), चार मार्च (भाषा) आंध्र प्रदेश द्वारा उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा के तौर पर अपनाने के लिए अपनाई गई रूपरेखा का अध्ययन करने के लिए कर्नाटक सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने इसी तरह का दर्जा तुलु को देने के सरकार के कदम का समर्थन करते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग के पूर्व निदेशक के.एम. गायत्री की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति ने आंध्र प्रदेश द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं का अध्ययन किया है।

उन्होंने कहा कि समिति ने 19 और 20 जनवरी को आंध्र प्रदेश सचिवालय का दौरा किया और कानूनी प्रावधानों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और मानकों को समझने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की।

इस समिति में कर्नाटक तुलु साहित्य अकादमी के अध्यक्ष तारंत गट्टी कपिकाड भी परामर्शदाता की क्षमता में शामिल थे।

अधिकारियों ने कहा कि कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग के सचिव जे. मंजूनाथ को सौंपी गई रिपोर्ट में तुलु के ऐतिहासिक, भाषाई एवं सांस्कृति महत्व को रेखांकित किया गया है।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस अध्ययन का उद्देश्य तुलु को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने में मानक और प्रक्रियात्मक दिशानिर्देशों को समझने में कर्नाटक की मदद करने के लिए सूचना एकत्र करना था।

उल्लेखनीय है कि तुलु दक्षिण कन्नड़ और उडुपी एवं पड़ोसी राज्य केरल के कासरगोड़ के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। इसे दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग कई वर्षों से सांस्कृतिक संगठन उठाते रहे हैं।

भाषा सं राजेंद्र शफीक

शफीक


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