उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को लखनऊ के कुकरैल वन में नाइट सफारी की मंजूरी दी

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को लखनऊ के कुकरैल वन में नाइट सफारी की मंजूरी दी

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को लखनऊ के कुकरैल वन में नाइट सफारी की मंजूरी दी
Modified Date: July 15, 2026 / 06:13 pm IST
Published Date: July 15, 2026 6:13 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार को लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षी ‘नाइट सफारी और प्राणि उद्यान परियोजना’ को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने इस परियोजना से पूरे वन क्षेत्र के प्रभावित होने की दलील खारिज करते हुए कहा, ‘‘क्या यह देश हमेशा ठहराव की स्थिति में रहे? चिड़ियाघर अब पुराने हो गए हैं। इन सब चीजों को देखने के लिए विशेषज्ञ मौजूद हैं।’’

खंडपीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल हैं।

उसने कहा, ‘‘जांच-पड़ताल के बाद और शर्तें तय करके एवं उनका अनुपालन सुनिश्चित करते हुए, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की मदद से सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं।’’

खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह परियोजना के लिए केंद्र से जरूरी मंजूरी लेने के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय की बनाई उच्चाधिकार समिति (सीईसी), केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की शर्तों का सख्ती से पालन करे।

शीर्ष अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि सीईसी ने कुकरैल ‘नाइट सफारी’ परियोजना को मंजूरी दे दी है।

पीठ ने सीईसी को निर्देश दिया कि वह मौके पर जाकर देखे कि क्या संबंधित प्रशासन शर्तों का पालन कर रहा है और तीन महीने बाद रिपोर्ट पेश करे।

प्रधान न्यायाधीश ने कुछ याचिकाकर्ताओं को परियोजना के संबंध में सीईसी को अपने सुझाव देने की अनुमति दी।

दो चरणों में बंटी यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत की पहली शहरी ‘नाइट सफारी’ है, जो 5,000 हेक्टेयर में फैले कुकरैल वन क्षेत्र में बनेगी और इस पर लगभग 1,500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

मंजूरी देते समय सीईसी ने (72 एकड़ में फैले) लखनऊ चिड़ियाघर को कुकरेल में स्थानांतरित करने के सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। सीईसी ने सरकार से इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए कहा कि वह जंगल से गुजरने वाली मौजूदा सड़क को चार-लेन वाले कॉरिडोर के बजाय दो-लेन वाले रास्ते में बदले।

‘एडवेंचर जोन’ की योजना में मूल रूप से ट्राम सेवा, अंधेरा होने के बाद जंगल का अनुभव, कई तरह की रोमांचक गतिविधियां और ‘ऑग्मेंटेड रियल्टी’ (एआर) आधारित थिएटर शामिल थे, लेकिन उसे अब रद्द कर दिया गया है।

भाषा

राजकुमार पारुल

पारुल


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