उच्चतम न्यायालय ने घर खरीदारों के लिए पार्श्वनाथ डेवलपर्स का प्रस्ताव खारिज किया

उच्चतम न्यायालय ने घर खरीदारों के लिए पार्श्वनाथ डेवलपर्स का प्रस्ताव खारिज किया

उच्चतम न्यायालय ने घर खरीदारों के लिए पार्श्वनाथ डेवलपर्स का प्रस्ताव खारिज किया
Modified Date: September 8, 2026 / 06:53 pm IST
Published Date: September 8, 2026 6:53 pm IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पार्श्वनाथ डेवलपर्स के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें सैकड़ों परेशान घर खरीदारों को फ्लैट का कब्जा सौंपने या ब्याज सहित पैसे लौटाने के बारे में जानकारी दी गई थी। न्यायालय ने कहा कि यह कार्यवाही में देरी करने का ‘‘एक और तरीका’’ लगता है।

शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि जब तक कंपनियों और उनकी अनुषंगी कंपनियों में सभी घर खरीदारों के दावों को पूरा करने वाला कोई नया प्रस्ताव रिकॉर्ड पर नहीं रखा जाता, तब तक वह ‘‘सभी जिम्मेदारियां सौंपने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति नियुक्त करने के लिए मजबूर’’ होगा।

घर खरीदारों के दावों में धन वापसी, कब्जा मिलने में देरी के लिए मुआवजा और रियल एसटेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के आदेशों का पालन न होना शामिल है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा, ‘‘हम यह समझते हैं कि यह प्रस्ताव (घर खरीदारों को (फ्लैट का) कब्जा देने और पैसे वापस करने में देरी करने का एक और तरीका है।’’

पीठ ने कंपनी को एक और प्रस्ताव दाखिल करने की अनुमति दे दी, जो लंबे समय से अपने घरों का इंतजार कर रहे घर खरीदारों को स्वीकार हो।

इसने कहा कि अधिकारियों को घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए काम करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने बिल्डर के साथ मिलकर साजिश रची; जिसने हरियाणा रेरा जैसे अर्ध-न्यायिक निकाय के आदेशों का भी पालन नहीं किया था।

पीठ ने रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही के लिए नियुक्त दिवालियापन समाधान पेशेवर (आईआरपी) की उस अर्जी पर भी विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने प्रतिबंधित किए गए बैंक खातों में से कंपनी का कामकाज चलाने के लिए कम से कम एक खाते को संचालित करने की अनुमति मांगी थी।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अगर आईआरपी उपयोगी होते और ठीक से काम कर रहे होते, तो लोग हमारे पास नहीं आते।’’ उन्होंने कहा कि वह इस समय उनके खिलाफ ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते।

कंपनी के वकील ने बताया कि पार्श्वनाथ समूह को अपनी 24 आवासीय परियोजनाओं के तहत 27,000 घर बनाने थे, जिनमें से 24,000 घर बिक चुके हैं और लगभग 3,000 घरों का कब्जा दिया जाना अभी बाकी है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘वे पहले ही बहुत कुछ झेल चुके हैं। आप उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में 500 करोड़ रुपये जमा करें। हम एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाएंगे और फिर देखेंगे।’’

भाषा

नेत्रपाल प्रशांत

प्रशांत


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