Supreme Court on Reservation: ’50 प्रतिशत से ज्यादा रिजर्वेशन नहीं’ सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के मुद्दे पर सुनाया अहम फैसला

Ads

Supreme Court on Reservation: '50 प्रतिशत से ज्यादा रिजर्वेशन नहीं' सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के मुद्दे पर सुनाया अहम फैसला

  •  
  • Publish Date - October 16, 2025 / 02:02 PM IST,
    Updated On - October 16, 2025 / 02:14 PM IST

Supreme court on Rohingya Issues: तो क्या घुसपैठियों के लिए रेड कार्पेट लगा बिछाएं? Image: File

HIGHLIGHTS
  • 50% से अधिक आरक्षण दिए जाने से इनकार
  • सामान्य क्षेत्रों में इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता
  • आरक्षण की छूट केवल अनुसूचित/आदिवासी क्षेत्रों में ही लागू

नई दिल्ली: Supreme Court on Reservation आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार के आरक्षण के मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए 50 फीसदी से अधिक आरक्षण दिए जाने से इंकार कर दिया है। तेलंगाना सरकार के फैसले को हाई कोर्ट ने खारिज किया था, जिसे शीर्ष अदालत में रेवंत रेड्डी सरकार ने चैलेंज किया था। अब उसे शीर्ष अदालत में भी झटका लगा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि जाति आधारित आरक्षण की 50 फीसदी की तय सीमा है और उसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता।

Supreme Court on Reservation मामले में सुनवाई के दौरान, जस्टिस नाथ ने तेलंगाना सरकार के वकील अभिषेक सिंघवी से पूछा कि आरक्षण को चुनाव अधिसूचित होने से पहले लागू क्यों नहीं किया गया था। जिसके बाद सिंघवी ने जवाब दिया कि राज्यपाल ने बिल को लंबित रखा था, और यह तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए “मानद सहमति” के आधार पर कानून बन गया था। उन्होंने तर्क दिया कि कानून को चुनौती दिए बिना ही इस पर रोक लगा दी गई थी।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि चुनाव मौजूदा आरक्षण के आधार पर होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आरक्षण सीमा से अधिक छूट केवल अनुसूचित क्षेत्रों और आदिवासी क्षेत्रों में लागू होती है, जो तेलंगाना में नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामान्य क्षेत्रों में आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता, भले ही ‘ट्रिपल-टेस्ट’ लागू हो। कोर्ट ने कृष्णमूर्ति मामले में दिए गए अपने पिछले फैसलों को दोहराया। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की बढ़ी हुई आरक्षण को भी शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था।

ये भी पढ़ें

दिवाली से पहले युवाओं के लिए खुशखबरी! सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, इन परीक्षाओं के लिए आवेदन शुरू, 30 अक्टूबर तक करें अप्लाई

CG Naxalites Biggest Surrender: देश में हथियारबंद नक्सलियों का सबसे बड़ा सरेंडर कल बस्तर में.. ‘रेड कार्पेट’ बिछाकर होगा स्वागत, जानें कितनी होगी माओवादियों की संख्या..

Supreme Court ने आरक्षण की कितनी सीमा तय की है?

सुप्रीम कोर्ट ने जाति आधारित आरक्षण की 50% की अधिकतम सीमा तय की है।

तेलंगाना सरकार ने आरक्षण को कितना बढ़ाने की मांग की थी?

तेलंगाना सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण को 42% तक बढ़ाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

50% की आरक्षण सीमा को तोड़ने की छूट किन क्षेत्रों में है?

50% की आरक्षण सीमा को तोड़ने की छूट केवल अनुसूचित क्षेत्रों और आदिवासी क्षेत्रों में लागू होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में किस मामले का हवाला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कृष्णमूर्ति मामले और महाराष्ट्र/मध्य प्रदेश में बढ़ी हुई आरक्षण को खारिज करने के पिछले फैसलों का हवाला दिया।

तेलंगाना सरकार के वकील ने मानद सहमति की दलील क्यों दी?

उन्होंने दलील दी कि राज्यपाल द्वारा बिल लंबित रखने के बावजूद, तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में SC के फैसले के आधार पर यह मानद सहमति से कानून बन गया था।