न्यायालय ने वक्फ संस्थान की न्यायाधिकरण में अदालत शुल्क में छूट संबंधी याचिका पर उठाए सवाल
न्यायालय ने वक्फ संस्थान की न्यायाधिकरण में अदालत शुल्क में छूट संबंधी याचिका पर उठाए सवाल
नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राज्य वक्फ न्यायाधिकरणों के समक्ष कार्यवाही में वक्फ संस्थानों को अदालती शुल्क के भुगतान से छूट देने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने ये टिप्पणियां गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कीं, जिसमें अदालती शुल्क का भुगतान न करने के कारण वक्फ मुकदमों को खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा गया था। उच्च न्यायालय ने अपने पहले के उस फैसले पर भरोसा किया था जिसमें कहा गया था कि वक्फ संस्थाएं राज्य वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष अदालती शुल्क का भुगतान करने से मुक्त नहीं हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एजाज मकबूल ने गुजरात उच्च न्यायालय के दिसंबर 2025 के फैसले को चुनौती देने वाले अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगा।
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने हालांकि मकबूल से अदालती शुल्क से छूट के दावे के आधार पर सवाल किया।
उन्होंने पूछा, “छूट कैसे मिल सकती है? वह कौन सा कानून है जो आपको अदालती शुल्क से छूट मांगने की अनुमति देता है?”
मकबूल ने जवाब दिया कि याचिकाकर्ता इस मुद्दे को विस्तार से जवाब दाखिल करेंगे और अदालत से सुनवाई को सात अगस्त तक स्थगित करने का आग्रह किया।
गुजरात उच्च न्यायालय ने 17 दिसंबर, 2025 को वक्फ संस्थानों द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह को खारिज कर दिया, जिसमें गुजरात राज्य वक्फ न्यायाधिकरण के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें अपर्याप्त अदालती शुल्क के कारण वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों पर कार्यवाही को अस्वीकार कर दिया गया था।
अदालत ने यह माना कि गुजरात राज्य वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष वक्फ अधिनियम की धारा 83 के तहत शुरू की गई कार्यवाही के लिए अदालती शुल्क के भुगतान से वक्फ संस्थानों को कोई पूर्ण छूट या माफी उपलब्ध नहीं है।
भाषा प्रशांत माधव
माधव

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