उच्चतम न्यायालय का सावरकर के चित्रों को हटाने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार

उच्चतम न्यायालय का सावरकर के चित्रों को हटाने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार

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  • Publish Date - January 13, 2026 / 04:05 PM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 04:05 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को संसद और अन्य सार्वजनिक स्थानों से विनायक दामोदर सावरकर के चित्रों को हटाने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति देने से पहले भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता ( सेवानिवृत्त भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी बी बालमुरुगन) को इस तरह की तुच्छ याचिका दायर करने के प्रति चेतावनी दी और संकेत दिया कि अदालत का समय बर्बाद करने के लिए भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस तरह की तुच्छ याचिका… मानसिकता दर्शाती है।’’ पीठ याचिकाकर्ता के इस निवेदन से नाराज थी कि वह वित्तीय बाधाओं के कारण व्यक्तिगत रूप से मामले की बहस करने नहीं आ सकता।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आप आईआरएस (अधिकारी) थे। आप दिल्ली आकर खुद पेश हो सकते हैं और बहस कर सकते हैं। हम आप पर भारी जुर्माना लगाना चाहेंगे। आप खुद को क्या समझते हैं?’’

बालमुरुगन ने अपनी जनहित याचिका में संसद के केंद्रीय कक्ष और अन्य सार्वजनिक स्थानों से सावरकर के चित्रों को हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

इसके अतिरिक्त, याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि सरकार हत्या या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों जैसे जघन्य अपराधों के लिए आरोपित व्यक्तियों को तब तक सम्मानित न करे जब तक कि वे बरी न हो जाएं।

सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की पृष्ठभूमि और सेवा रिकॉर्ड, जिसमें सेवानिवृत्ति से पहले उनकी अंतिम तैनाती और उन्हें पदोन्नति से वंचित किये जाने की परिस्थितियां शामिल हैं, के बारे में पूछताछ की।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो बालमुरुगन ने नहीं में जवाब दिया और कहा कि 2009 में ‘श्रीलंका में शांति’ के लिए भूख हड़ताल करने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई थी।

याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह मामला आगे बढ़ाना चाहते हैं या वापस लेना चाहते हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘‘कृपया इन सब झंझटों में न पड़ें। अब अपनी सेवानिवृत्ति का आनंद लें। समाज में कुछ रचनात्मक भूमिका निभाएं।’’

परिणाम को भांपते हुए बालमुरुगन ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

भाषा संतोष पवनेश

पवनेश