उच्चतम न्यायालय ने जमीन घोटाला मामले में अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

उच्चतम न्यायालय ने जमीन घोटाला मामले में अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

उच्चतम न्यायालय ने जमीन घोटाला मामले में अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
Modified Date: September 10, 2026 / 01:38 pm IST
Published Date: September 10, 2026 1:38 pm IST

नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय की सालबोनी जमीन घोटाला मामले में अग्रिम जमानत याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।

आरोप हैं कि पश्चिम बंगाल की सरकारी जमीन को कथित तौर पर बेच दिया गया और बिक्री से मिली रकम पार्टी के खाते में जमा कराई गई।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने छह अगस्त के अपने उस पुराने आदेश को भी वापस ले लिया, जिसमें रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी।

न्यायालय के इस आदेश के बाद अब सुमित रॉय को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है।

पीठ ने रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद रॉय को राहत देने से इनकार कर दिया।

इससे पहले तीन अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कथित सरकारी जमीन घोटाला मामले में रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इस मामले की जांच सालबोनी पुलिस कर रही है।

मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

सॉलिसिटर जनरल ने अंतरिम राहत का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि मामले की जांच के लिए रॉय को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।

न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की पीठ ने रॉय को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।

राज्य सरकार के वकील ने उच्च न्यायालय को बताया था कि जांच के दौरान सरकारी जमीन से संबंधित फर्जी स्वामित्व दस्तावेज (टाइटल डीड) सामने आए हैं।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि स्थानीय नेताओं और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से सरकारी जमीन का हस्तांतरण किया गया था।

भाषा शोभना वैभव

वैभव


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