नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को ‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन’ (एससीएओआरए) के आगामी चुनावों में सचिव, संयुक्त कोषाध्यक्ष और दो कार्यकारी पदों को महिला वकीलों के लिए आरक्षित कर दिया।
न्यायालय ने यह आदेश पारित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का हवाला दिया। यह अनुच्छेद उच्चतम न्यायालय को किसी भी लंबित मामले में ‘पूर्ण न्याय’ प्रदान करने के लिए आवश्यक कोई भी डिक्री या आदेश पारित करने का असाधारण अधिकार देता है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) विव्या नागपाल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में न्यायालय से एससीएओआरए के कार्यकारी निकाय में महिलाओं के लिए कम से कम 33 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य करने का अनुरोध किया गया था। याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए याचिका को स्वीकार करने का निर्देश दे।
इसमें एसोसिएशन के वर्ष 2026 से 2028 तक के कार्यकाल के लिए आठ अप्रैल को जारी चुनाव अधिसूचना को भी चुनौती दी गई थी और दलील दी गयी थी कि इसमें महिला उम्मीदवारों के लिए कोई आरक्षण नहीं है।
याचिकाकर्ता ने आरक्षण के अभाव में अधिसूचना रद्द करने का अनुरोध करते हुए दलील दी कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और निकाय में नेतृत्व की भूमिकाओं से महिलाओं के व्यवस्थित बहिष्कार को कायम रखता है।
याचिका के अनुसार, इस संगठन में लगभग 3,000 पंजीकृत वकील शामिल हैं, जिन्हें उच्चतम न्यायालय में मामले दायर करने और उनपर पैरवी करने का विशेष अधिकार प्राप्त है।
इस संगठन में पदाधिकारियों के पदों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से नगण्य रहा है, और वर्तमान कार्यकारी समिति में सभी सदस्य पुरुष हैं।
याचिकाकर्ता ने तत्काल राहत के लिए आवेदन दायर करके अनुरोध किया है कि चुनाव प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने या वैकल्पिक रूप से कार्यकारी और पदाधिकारी के पदों पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ चुनाव कराने का निर्देश दिया जाए।
भाषा संतोष सुरेश
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