उच्चतम न्यायालय ने औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत ‘उद्योग’ की परिभाषा पर फैसला सुरक्षित रखा
उच्चतम न्यायालय ने औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत 'उद्योग' की परिभाषा पर फैसला सुरक्षित रखा
नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय की एक संविधान पीठ ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा के विवादास्पद मुद्दे पर अपना फैसला बृहस्पतिवार को सुरक्षित रख लिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने तीन दिन तक चली सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज और अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं जैसे शेखर नफाड़े, इंदिरा जयसिंह, सी यू सिंह और संजय हेगड़े सहित विभिन्न वकीलों की दलीलें सुनीं।
इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल हैं।
पीठ ने कहा कि वह श्रम संबंधों को नियंत्रित करने के लिए ‘उद्योग’ शब्द की व्यापक व्याख्या देने वाली सात-सदस्यीय पीठ के 1978 के फैसले की कानूनी वैधता की जांच करेगी।
सात-सदस्यीय पीठ ने 21 फरवरी, 1978 को बैंगलोर जल आपूर्ति और मलजल शोधन बोर्ड की याचिका पर फैसला सुनाते हुए ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा का विस्तार किया, जिससे अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, क्लबों और सरकारी कल्याण विभागों में कार्यरत लाखों कर्मचारी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के दायरे में आ गए।
उच्चतम न्यायालय ने 16 फरवरी को नौ-सदस्यीय संविधान पीठ के विचार के लिए व्यापक मुद्दे निर्धारित किये थे।
पीठ ने कहा था, ‘‘क्या बैंगलोर जल आपूर्ति एवं मलजल शोधन बोर्ड मामले (1978) में न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर द्वारा दिए गए मत के अनुच्छेद 140 से 144 में निर्धारित जांच यह निर्धारित करने के लिए कि कोई उपक्रम या उद्यम ‘उद्योग’ की परिभाषा के अंतर्गत आता है या नहीं, सही कानून है?’’
पीठ ने कहा था कि नौ-सदस्यीय पीठ द्वारा विचार किए जाने वाले मुद्दों में से एक यह भी होगा कि क्या सरकारी विभागों या उनके संस्थानों द्वारा की जाने वाली सामाजिक कल्याण गतिविधियों और योजनाओं या अन्य उद्यमों को औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(जे) के प्रयोजन के लिए ‘औद्योगिक गतिविधियां’ माना जा सकता है।
भाषा अविनाश सुरेश
सुरेश

Facebook


