उच्चतम न्यायालय ने ओबीसी आरक्षण से संबंधित याचिकाओं को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय वापस भेजा

उच्चतम न्यायालय ने ओबीसी आरक्षण से संबंधित याचिकाओं को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय वापस भेजा

उच्चतम न्यायालय ने ओबीसी आरक्षण से संबंधित याचिकाओं को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय वापस भेजा
Modified Date: February 21, 2026 / 09:05 pm IST
Published Date: February 21, 2026 9:05 pm IST

नयी दिल्ली, 21 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की वैधता से संबंधित याचिकाओं को राज्य उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया है।

राज्य सरकार ने 2019 में मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को इन मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष पीठ गठित करने का निर्देश देते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इन याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर फैसला किया जाये।

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने इस मुद्दे पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 19 फरवरी को यह आदेश पारित किया था।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारी राय ​​है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय राज्य के लिए जरूरतों के साथ ही इसकी वैधता पर समग्र रूप से विचार करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होगा।’’

इसने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए, उच्च न्यायालय के निर्णय के बिना, इन मुद्दों की स्वतंत्र रूप से जांच करना अनुचित होगा।

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, हम उच्च न्यायालय से इन याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई और निपटारे को सुनिश्चित करने का अनुरोध करके हितों का संतुलन बना सकते हैं।’’

इसने कहा, ‘‘उपरोक्त के मद्देनजर, हम इन अपीलों, विशेष अनुमति याचिकाओं, स्थानांतरित मामलों और रिट याचिकाओं के समूह को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को वापस भेजते हैं।’’

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय में जिन पीठों के समक्ष मामलों को सौंपा जाएगा, वे संबंधित पक्षों द्वारा प्रस्तुत आवेदनों पर भी विचार कर सकती हैं।

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘मामले की तात्कालिकता को देखते हुए, अनुरोध है कि जिस पीठ को ये मामले सौंपे जाये, वह आज से तीन महीने के भीतर इन चुनौतियों पर विचार करके इनका निपटारा करे।’’

उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष या रिट याचिकाओं के निपटारे तक अंतरिम व्यवस्था पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।

भाषा

देवेंद्र माधव

माधव


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