न्यायालय ने महिला वकील पर हमले का स्वतः संज्ञान लिया, अंतरिम निर्देश जारी

न्यायालय ने महिला वकील पर हमले का स्वतः संज्ञान लिया, अंतरिम निर्देश जारी

न्यायालय ने महिला वकील पर हमले का स्वतः संज्ञान लिया, अंतरिम निर्देश जारी
Modified Date: April 27, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: April 27, 2026 8:35 pm IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने एक महिला वकील पर उसके पति द्वारा कथित तौर पर किए गए क्रूर हमले का सोमवार को संज्ञान लिया और दिल्ली पुलिस आयुक्त को जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, अधिमानतः एसीपी या डीसीपी रैंक की महिला अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने अधिवक्ता स्नेहा कलिता द्वारा प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किये जाने के बाद मामले का स्वत: संज्ञान लिया। पत्र में कलिता ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) पीड़ित मुआवजा योजना के तहत मुआवजा प्रदान करने का भी अनुरोध किया है।

पीठ ने इस मामले में जांच अधिकारी को तीन अस्पतालों द्वारा पीड़िता को भर्ती करने से इनकार करने संबंधी पहलू की जांच करने का भी निर्देश दिया।

आरोपों के अनुसार, यहां कड़कड़डूमा जिला न्यायालय में वकालत करने वाली पीड़ित महिला वकील पर उनके पति ने 22 अप्रैल को सोनिया विहार में तलवार और चाकू से बेरहमी से हमला किया।

पीठ ‘वकील समुदाय के एक सदस्य पर बेरहमी से हमला और न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता’ शीर्षक वाले स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान कलिता ने पीठ को बताया कि हमले के बाद पीड़िता किसी तरह अपने परिवार और पीसीआर को फोन करने में कामयाब रही।

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि प्राथमिकी दर्ज की गई थी और कथित मुख्य आरोपी (पीड़िता का पति) को 25-26 अप्रैल की दरमियानी रात को गिरफ्तार कर लिया गया था।

प्रधान न्यायाधीश ने भाटी से पूछा, ‘‘कृपया पता लगाएं कि अस्पतालों ने पीड़िता को आपातकालीन उपचार देने से इनकार क्यों किया।’’

प्रधान न्यायाधीश ने यह सवाल तब पूछा, जब यह दावा किया गया कि तीन अस्पतालों ने पीड़िता को भर्ती करने से मना कर दिया था, जिसे बाद में एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था।

पीठ ने गौर किया कि कलिता द्वारा लिखा गया पत्र रविवार को प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय में प्राप्त हुआ था।

संदिग्ध या आरोपी के निष्पक्ष जांच के अधिकार और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी दोषी सजा से बच न पाए पीठ ने इस मामले में कई अंतरिम निर्देश पारित किए।

न्यायालय ने कहा, ‘‘दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया जाता है कि वे इस जांच को किसी काफी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपें, और बेहतर होगा कि सहायक या पुलिस उपायुक्त रैंक की महिला अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाए।’’

पीठ ने कहा कि पीड़िता के ससुराल वालों पर आरोप हैं और वे फरार बताए जा रहे हैं।

पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि पीड़िता की तीन नाबालिग बेटियां हैं। पीठ ने कहा कि कलिता ने उसे सूचित किया है कि हमले के बाद पीड़िता के ससुराल वाले उसकी दो नाबालिग बेटियों (चार वर्षीय और एक वर्षीय) को अपने साथ ले गए और उनका कोई पता नहीं चल पाया है।

पीठ ने कहा कि सबसे बड़ी बेटी 12 साल की है और आरोपी ने कथित तौर पर उसे रात में घर के बाहर छोड़ दिया गया था, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया।

पीठ ने पुलिस को दोनों नाबालिग बच्चियों का पता लगाने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि बड़ी बेटी की अभिरक्षा उसके नाना-नानी के पास ही रहेगी।

पीठ ने कलिता से इस मामले में सहायक वकील के रूप में सहयोग करने का अनुरोध किया।

पीड़िता को वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी, विशेषकर इलाज कराने और अपनी नाबालिग बेटियों की देखभाल करने के लिए। इस बात को ध्यान में रखते हुए पीठ ने एनएएलएसए को पीड़िता के पक्ष में तीन लाख रुपये की अंतरिम राशि जारी करने का निर्देश दिया।

पीठ ने जांच अधिकारी को जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 11 मई को तय की।

पुलिस ने पहले बताया था कि आरोपी मनोज कुमार, जो सोनिया विहार का निवासी है, को रविवार को खजूरी खास इलाके से गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने बताया कि कुमार ने कथित तौर पर 22 अप्रैल को अपनी 38 वर्षीय पत्नी पर चाकू से हमला किया था।

पुलिस ने कहा, ‘‘पूछताछ के दौरान, कुमार ने जुर्म कबूल कर लिया और पुलिस को बताया कि उसने एक पारिवारिक विवाद के बाद अपनी पत्नी पर हमला किया।’’

पुलिस ने बताया कि हमले का कारण घरेलू कलह माना जा रहा है, हालांकि जांचकर्ता सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप


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