न्यायालय ने फैसले को बरकरार रखा, पीएमके चुनाव चिह्न विवाद पर दीवानी अदालत सुनाएगी फैसला
न्यायालय ने फैसले को बरकरार रखा, पीएमके चुनाव चिह्न विवाद पर दीवानी अदालत सुनाएगी फैसला
नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक एस. रामदास की दो याचिकाओं को खारिज करने वाले मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा और उन्हें दीवानी अदालत में जाने के लिए कहा गया।
इन याचिकाओं में उनके गुट को तमिलनाडु और पुडुचेरी में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान या तो ‘आम’ चुनाव चिह्न के उपयोग की इजाजत देने या फिर इसे जब्त करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
रामदास अपने बेटे अंबुमणि को पार्टी के नाम, झंडे और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग (ईसी) किसी अपंजीकृत राजनीतिक दल के चिह्नों के आवंटन विवाद का फैसला नहीं कर सकता है तथा अगर मंगलवार तक समाधान के लिए आवेदन दायर किया जाता है तो दीवानी अदालत तीन दिनों के भीतर इस पर फैसला सुना सकती है।
शीर्ष अदालत ने आदेश में कहा, ‘‘यह मानना सही प्रतीत होता है कि किसी गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच चुनाव चिह्न के आवंटन से संबंधित विवाद का निर्णय भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं किया जा सकता है। हमने समय-समय पर पारित आदेशों का अध्ययन किया है और यह कहना आवश्यक है कि पीड़ित पक्ष को न्यायसंगत स्थिति से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।’’
न्यायालय ने आदेश में कहा, ‘‘याचिकाकर्ता पहले ही दीवानी मुकदमा दायर कर चुका है, इसलिए याचिकाकर्ता दीवानी अदालत में उचित आवेदन दाखिल कर सकता है। यदि ऐसा आवेदन कल यानी 24 मार्च 2026 तक दाखिल किया जाता है, तो हम दीवानी अदालत को निर्देश देते हैं कि वह पक्षों को सुनने के बाद और कानून के अनुसार तीन दिनों के भीतर इस पर फैसला करे।’’
पीएमके की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि अगर निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव चिह्न को ‘अनफ्रीज’ कर दिया जाता है, तो लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किसी को भी पार्टी का चुनाव चिह्न- ‘आम’ आवंटित किया जा सकता है।
विभिन्न पक्षों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, मुक्ता गुप्ता और श्याम दीवान ने कहा कि इस मुद्दे का फैसला केवल दीवानी अदालत ही कर सकती है, क्योंकि निर्वाचन आयोग अपंजीकृत राजनीतिक दलों से संबंधित चुनाव चिह्नों पर विवाद का निपटारा नहीं कर सकता है।
हालांकि, सिंह ने दलील दी कि अंततः निर्वाचन आयोग को ही पार्टी के चुनाव चिह्न का फैसला करना होगा।
तमिलनाडु में मतदान 23 अप्रैल को और पुडुचेरी में नौ अप्रैल को निर्धारित है, जबकि मतगणना चार मई को होगी।
भाषा यासिर नरेश सुरेश
सुरेश

Facebook


