नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की संवैधानिक वैधता को स्वीकार किया है, लेकिन उसके फैसले ने जवाबों से कहीं अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस ने फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि कानूनी मंजूरी से एसआईआर को प्रथम दृष्टया वैधता तो मिल सकती है, लेकिन इससे ‘‘कार्यान्वयन में दुर्भावना’’ दूर नहीं हो सकती।
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि यह मुद्दा हमेशा से इसके तथ्यों और इरादों का रहा है, न कि केवल प्रक्रियात्मक स्वरूप का। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उस तौर तरीके और समय पर सवाल उठाए हैं, जिसके जरिए निर्वाचन आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया है।
उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने वास्तव में एसआईआर की संवैधानिक वैधता को स्वीकार किया, लेकिन न्यायालय ने जितने जवाब दिए हैं, उतने ही सवाल भी खड़े किए हैं।’’
सिंघवी ने निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया के संचालन में कई कमियों का उल्लेख किया, जिन्हें न्यायालय में चुनौती दी गई थी। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यायालय ने इन खामियों पर कोई टिप्पणी नहीं की।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने कानून के आधार पर अपना निष्कर्ष दिया है। हम इस फैसले से सम्मानपूर्वक असहमत हो सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रक्रिया स्पष्ट रूप से खामियों से भरी और दुर्भावना पर आधारित है। कानूनी मंजूरी प्रथम दृष्टया वैधता प्रदान कर सकती है, लेकिन यह कार्यान्वयन में निहित दुर्भावना को दूर नहीं कर सकती।’’
रमेश ने कहा कि न्यायालय के फैसले में कहा गया है कि नागरिकता का औपचारिक और अंतिम निर्धारण निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं किया जा सकता है और यह अधिकार नागरिकता अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकार यानी गृह मंत्रालय के पास है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने नागरिकता के आधार पर पहले ही लोगों को बाहर कर दिया है, और पूछा कि क्या यह विरोधाभास नहीं है?
कांग्रेस नेता ने कई राज्यों में एसआईआर कवायद में लगे कम समय की ओर भी इशारा किया और पूछा कि निर्वाचन आयोग ने उन राज्यों में यह प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की जहां चुनाव एक साल बाद होने वाले हैं।
उन्होंने पूछा, ‘‘क्या इस पर उच्चतम न्यायालय की ओर से ध्यान देने, निष्कर्ष और टिप्पणी की आवश्यकता नहीं थी?’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य दलों ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में कई कमियों, खामियों को उजागर किया था। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट था कि आयोग का पक्ष दोषपूर्ण था और इससे पता चलता है कि गैर-सरकारी संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा दायर याचिकाओं के माध्यम से इन खामियों को दूर किया जाना था।
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को निर्वाचन आयोग को बड़ी राहत देते हुए एसआईआर कराने के उसके अधिकार को बरकरार रखते हुए कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक दायित्व में ‘‘जान फूंकती है।’’
भाषा आशीष पवनेश
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