तमिलनाडु हिरासत मौत मामला: परिवार ने ‘झूठी’ शिकायत दर्ज कराने वाली महिला की गिरफ्तारी की मांग की
तमिलनाडु हिरासत मौत मामला: परिवार ने ‘झूठी’ शिकायत दर्ज कराने वाली महिला की गिरफ्तारी की मांग की
शिवगंगा, पांच फरवरी (भाषा) तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में पिछले साल कथित तौर पर यातना की वजह से पुलिस हिरासत में दम तोड़ने वाले बी. अजित कुमार की मां बी. मालती ने बृहस्पतिवार को मांग की कि उनके बेटे को चोरी के आरोपों से मुक्त किये जाने की पृष्ठभूमि में शिकायतकर्ता महिला को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
बी. मालती ने कहा, ‘‘निकिता को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। हमें यह जानने की जरूरत है कि उसे ऐसा करने के लिए किसने कहा और उसने झूठी शिकायत क्यों दर्ज कराई। इसलिए, निकिता को पहले गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन पांचों (पुलिसकर्मियों) को कभी जेल से बाहर नहीं आना चाहिए।’’
मदुरै के तिरुमंगलम की निवासी निकिता 27 जून 2025 को अपनी बुजुर्ग मां के साथ मदपुरम के एक मंदिर में दर्शन करने गई थीं। जानकारी के मुताबिक निकिता ने मंदिर के अस्थायी सुरक्षा गार्ड अजित कुमार से अपनी गाड़ी पार्क करने का अनुरोध किया, क्योंकि उनकी मां को चलने में कठिनाई हो रही थी। उसी दिन बाद में निकिता ने तिरुभुवनम पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी कार में रखे एक बैग से 10 सावरन (सॉवरेन) (लगभग 80 ग्राम) के स्वर्णाभूषण गायब हो गए हैं। इसके बाद, पुलिस ने अजित कुमार को हिरासत में ले लिया था।
एक ‘सावरन’ भारत, विशेष रूप से दक्षिणी क्षेत्रों में, सोने के भार की एक व्यापक मान्यता प्राप्त इकाई है। ‘सावरन’ शब्द सोने का एक निश्चित वजन दर्शाता है, जो करीब आठ ग्राम के बराबर होता है।
कथित तौर पर पुलिस द्वारा यातना दिये जाने से अजित की बाद में मौत हो गई थी।
इस मामले की जांच कर रही सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) ने चार फरवरी को मद्रास उच्च न्यायालय को सूचित किया कि चोरी के आरोप का सामना कर रहा अजित निर्दोष था।
मालती ने बृहस्पतिवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीबीआई के निष्कर्षों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा, ‘‘न्यायाधीशों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि मेरा बेटा चोर नहीं था। इससे कुछ शांति मिली है, लेकिन उसे खोने का दर्द अब भी कम नहीं हुआ है। मैं जानना चाहती हूं कि जब पुलिस उसे पूर्वाह्न 11 बजे अपने साथ ले गई थी, तब मुझे सूचित क्यों नहीं किया गया। उन्होंने उसे अपराह्न दो बजे तक बिना हमें कुछ बताए अपने पास रखा।’’
मालती ने अदालत की टिप्पणियों पर राहत व्यक्त किया, लेकिन पूरी घटना का ब्योरा देते हुए वह भावुक हो गईं।
उन्होंने पुलिस पर बेटे को क्रूर यातना देने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि उसके साथ ‘‘आतंकवादी की तरह’’ व्यवहार किया गया।
मालती ने कहा, ‘‘उन्होंने उसे पेड़ से लटकाकर यातनाएं दीं। उन्होंने मिर्च पाउडर का भी इस्तेमाल किया। क्या कोई ऐसा कानून है जो कहता है कि किसी को पानी तक नहीं देना चाहिए? मेरा बेटा इन लोगों की वजह से दर्दनाक मौत मरा।’’
परिवार का पक्ष अदालत में रख रहे वकील ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ की कार्यवाही की जानकारी देते हुए कहा कि न्यायमूर्ति श्रीमती ने सीबीआई को 17 फरवरी तक यथास्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में इस बात के विस्तृत ब्योरे की उम्मीद है कि क्या चोरी हुई भी थी, पुलिस की संलिप्तता किस हद तक थी और उच्च पदस्थ अधिकारियों की भूमिका क्या थी।
अधिवक्ता ने बताया, ‘‘सीबीआई ने 90 पन्नों का आरोप-पत्र तैयार किया है, जिससे यह पुष्टि होती है कि अजित कुमार ने गहनों की चोरी नहीं की थी। एजेंसी जल्द ही इसे अदालत में दाखिल करने वाली है। छह महीने तक यह परिवार चोर होने के कलंक के साये में रहा; आज उन्हें न्याय मिला है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत ‘‘पूर्व नियोजित मनगढ़ंत कहानी’’ थी, जिसका उद्देश्य आभूषणों की उगाही करना था।
संवाददाता सम्मेलन में उन चार युवकों- नवीन कुमार, प्रवीण कुमार, अरुण और विनोद को इस मामले में हुई परेशानी को भी रेखांकित किया गया, जिन्हें कथित तौर पर अजित के साथ हिरासत में लिया गया था और उनके साथ भी मारपीट की गई थी।
अधिवक्ता ने बताया कि सामाजिक कलंक के कारण ऑटो चालक अरुण की आजीविका छिन गई है, जबकि पूछताछ के दौरान प्रवीण का कान का पर्दा फट गया।
फिलहाल, इस मामले में चालक समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जा रही है।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश

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