चेन्नई, 20 जनवरी (भाषा) तमिलनाडु सरकार ने मंगलवार को केंद्र सरकार से हाल में पारित वीबी-जी राम जी अधिनियम को वापस लेने और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौर की ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा को बहाल करने का आग्रह किया, ताकि राज्य के वित्तीय बोझ को कम किया जा सके।
सरकार ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बंद करने से न केवल ग्रामीण विकास प्रभावित हुआ है, बल्कि राज्य सरकार पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा है।
तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष एम. अप्पावु ने राज्यपाल का अभिभाषण पढ़ते हुए कहा, “वीबी-जी राम जी के कारण तमिलनाडु पर सालाना लगभग 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा।”
राज्यपाल वर्ष के पहले विधानसभा सत्र के दौरान अपना पारंपरिक अभिभाषण देने के बजाय विधानसभा से बाहर चले गए। उन्होंने द्रमुक सरकार द्वारा तैयार किए गए पाठ में “असत्यताओं” का हवाला देते हुए यह कदम उठाया।
राज्यपाल के अभिभाषण का तमिल संस्करण पढ़ते हुए अप्पावु ने कहा कि नयी योजना वीबी-जी राम जी ने मनरेगा के मूल उद्देश्य को कमजोर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों गरीब और वंचित लोगों, विशेषकर महिलाओं और आदि द्रविड़ समुदायों के लिए वेतनभोगी रोजगार सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था।
उन्होंने योजना को वापस लेने का अनुरोध करते हुए कहा, “चूंकि राज्य सरकार पहले से ही विभिन्न केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्य की बढ़ी हुई हिस्सेदारी के कारण अपनी योजनाओं को लागू करने में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, इसलिए इस नयी योजना को केंद्र की प्रतिकूल मंशा के रूप में देखा जाना चाहिए।”
संसद द्वारा पारित वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत कुछ राज्यों को छोड़कर अन्य सभी राज्यों को ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को लागू करने पर होने वाले खर्च का 40 प्रतिशत वहन करना पड़ेगा जबकि शेष 60 प्रतिशत केंद्र प्रदान करेगा।
भाषा जोहेब माधव
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