नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण से संबंधित 1985 की एक जनहित याचिका का बृहस्पतिवार को निपटारा कर दिया और सर्वोच्च न्यायालय रजिस्ट्री को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण के मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।
पर्यावरणविद् एम.सी. मेहता द्वारा 1985 में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन तथा अन्य संबंधित मुद्दों के लिए दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में कई ऐतिहासिक फैसले और आदेश पारित किए गए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने गौर किया कि जनहित याचिका में विभिन्न मुद्दों पर कई आवेदन दायर किए गए थे और अदालत ने समय-समय पर उन पर निर्देश जारी किए थे।
पीठ ने कहा, ‘‘सुझावों को ध्यान में रखते हुए… हम औपचारिक रूप से रिट याचिका का निपटारा करते हैं।’’
इसने कहा कि इसके अलावा, उच्चतम न्यायालय रजिस्ट्री उस याचिका में किसी भी अंतरिम या विविध आवेदन पर विचार नहीं करेगी।
पीठ ने कहा, ‘‘इसके बजाय, रजिस्ट्री को ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के मुद्दे’ विषय पर स्वतः संज्ञान कार्यवाही दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।’’
इसने निर्देश दिया कि अब तक लंबित सभी आवेदनों को रिट याचिकाओं के रूप में पंजीकृत किया जाए और प्रत्येक अंतरिम आवेदन को एक अलग रिट याचिका संख्या आवंटित की जाए।
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देवेंद्र प्रशांत
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