तमिलनाडु: राज्यपाल रवि और स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार के बीच लगातार तनातनी की स्थिति रही

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तमिलनाडु: राज्यपाल रवि और स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार के बीच लगातार तनातनी की स्थिति रही

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 04:45 PM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 04:45 PM IST

चेन्नई, छह मार्च (भाषा) सेवानिवृत्त शीर्ष आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी आर. एन. रवि को 18 सितंबर 2021 को जब तमिलनाडु का 26वां राज्यपाल बनाया गया तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि उनका कार्यकाल राज्य के इतिहास में निर्वाचित सरकार के साथ सबसे अधिक टकरावों वाले कार्यकाल के रूप में दर्ज होगा।

रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

चाहे तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने का मुद्दा हो, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति का प्रश्न हो या फिर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लेकर हुआ विवाद समेत द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार के साथ नीतिगत टकराव का विषय हो, रवि अपने रुख से कभी पीछे नहीं हटे और अपने विचारों पर दृढ़ता से कायम रहे।

रवि और द्रमुक सरकार के बीच हुए विवादों का सबसे उल्लेखनीय परिणाम यह रहा कि राष्ट्रपति के संदर्भ के मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह घोषणा की कि राज्यपालों या राष्ट्रपति के लिए समयसीमा निर्धारित नहीं की जा सकती है और और ‘स्वतः स्वीकृति’ (निर्धारित अवधि तक कोई निर्णय नहीं लेने की स्थिति में यह मान लेना कि विधेयक को मंजूरी मिल गई है) जैसी कोई अवधारणा नहीं है।

वर्ष 2023 में राज्यपाल रवि ने अपने स्तर पर तत्कालीन मंत्री वी. सेंथिलबालाजी को ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद मंत्रिपरिषद से ‘‘बर्खास्त’’ कर दिया था किंतु कुछ समय बाद ही केंद्र की कथित सलाह के बाद उन्होंने अपने उस फैसले को रोक दिया था। उन्होंने कहा था कि बालाजी का मंत्रिमंडल में बने रहना ‘‘निष्पक्ष जांच सहित कानून की उचित प्रक्रिया को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा जिससे अंततः राज्य में संवैधानिक ढांचा टूटने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।’’

लंबित विधेयकों और कई अन्य मुद्दों को लेकर उनके और द्रमुक सरकार के बीच खींचतान शुरू हो गई। इसमें बी.वी. रमण और सी. विजय भास्कर सहित ऑल इंडिया अन्‍ना द्रविड़ मुन्‍नेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के पूर्व मंत्रियों पर मुकदमा भी शामिल है। राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के मामले में उन्होंने चयन समिति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नामित व्यक्ति को अनिवार्य किया और कहा कि यह उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुरूप है।

हालांकि, राज्य सरकार ने कहा कि वह संबंधित कानूनों का पालन कर रही है और यूजीसी द्वारा नामित व्यक्ति की नियुक्ति अनुचित है।

राजभवन के मुख्य द्वार के पास 25 अक्टूबर 2023 को पेट्रोल बम फेंका गया जिससे रवि और द्रमुक सरकार के बीच संघर्ष एक नए स्तर पर पहुंच गया। उस समय राज्यपाल कार्यालय ने आरोप लगाया था कि राज्यपाल के खिलाफ बयानबाजी और धमकियां अधिकतर सत्तारूढ़ द्रमुक और उसके सहयोगियों के नेता एवं कार्यकर्ता अपने सार्वजनिक सभाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से कर रहे हैं।

राजभवन ने आरोप लगाया था: ‘‘…माननीय राज्यपाल के खिलाफ गंभीर धमकियों के प्रति पुलिस की जानबूझकर की गई उदासीनता ने माननीय राज्यपाल और राजभवन की सुरक्षा को प्रभावित किया है… राजभवन पर हुए ये दुस्साहसी बम हमले इसी का परिणाम हैं।’’

राजभवन पर पेट्रोल बम हमले के मामले में कुख्यात अपराधी करुका विनोद को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया और 10 साल की जेल की सजा सुनाई।

रवि का कार्यकाल केवल विवादों से ही भरा नहीं था; उन्होंने नवाचार करने का भी प्रयास किया और लोक भवन (राज्यपाल का निवास) में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जिनमें उच्च शिक्षा संस्थानों का सम्मेलन ‘थिंक टू डेयर सीरीज’ शामिल था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक सांस्कृतिक अध्ययन यात्रा की व्यवस्था कराई। वह नियमित रूप से छात्रों से संवाद करते थे।

द्रविड़ विचारधारा के समर्थक निवर्तमान राज्यपाल पर अक्सर संत-कवि तिरुवल्लुवर और क्रांतिकारी संत वल्ललार जैसे तमिल प्रतीकों को ‘‘अपनाने’’ और उन्हें भारतीय सनातन परंपरा से जोड़ने का आरोप लगाते रहे हैं।

रवि दलितों के खिलाफ अपराध सहित कई मुद्दों को लेकर द्रमुक सरकार पर नियमित रूप से आरोप लगाते रहे। उन्हें तमिल भाषा सीखने में गहरी रुचि थी और उन्होंने राज्य के प्रत्येक स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किए। उन्होंने लोक भवन के दरबार हॉल का नाम बदलकर भारतीयर मंडपम रखा।

रवि का तबादला हो गया है और उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है। केरल में उनके समकक्ष रहे आर.वी. अर्लेकर को तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

भाषा सुरभि माधव

माधव