तमिलनाडु : शपथ ग्रहण समारोह रद्द होने के बाद कार्यक्रम स्थल से निराश होकर लौटे टीवीके समर्थक

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तमिलनाडु : शपथ ग्रहण समारोह रद्द होने के बाद कार्यक्रम स्थल से निराश होकर लौटे टीवीके समर्थक

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 12:54 PM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 12:54 PM IST

चेन्नई, सात मई (भाषा) तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के सैकड़ों समर्थक अपने नेता विजय को मुख्यमंत्री बनते देखने की आस लिए बृहस्पतिवार को शहर के नेहरू इनडोर स्टेडियम पहुंचे, लेकिन वहां बंद द्वार और निर्धारित कार्यक्रम को लेकर जानकारी के अभाव के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।

राज्य के अरुम्बक्कम और कोयंबटूर जैसे विभिन्न नजदीकी और दूरस्थ हिस्सों से आए कई समर्थकों ने परिसर बंद मिलने और कोई आधिकारिक सूचना नहीं होने पर गहरी निराशा व्यक्त की।

प्रशंसकों और पार्टी समर्थकों ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि वे कतार में जगह पाने के लिए सुबह जल्दी पहुंचे थे, लेकिन वहां पहुंचकर उनका दिल टूट गया।

विजय की एक समर्थक चारुलता ने उन्हें हुई भावनात्मक पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम बहुत खुशी के साथ आए थे कि वह आज मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन यहां कुछ भी नहीं है। द्वार बंद हैं। यह बहुत पीड़ादायक है।”

उनकी बेटी और 12वीं कक्षा की छात्रा साई दीपिका ने कहा, ‘‘मैं यहां आने को लेकर बहुत उत्साहित थी। मैंने सभी से कहा था कि वह जीतेंगे और लोगों के लिए अच्छे काम करेंगे।’’

विजय की एक अन्य समर्थक गुणसुंदरी ने कहा, ‘‘मैं सार्वजनिक रूप से कहती हूं कि मैंने विजय को वोट दिया। मुझे विश्वास है कि वह जरूरतमंदों की मदद करेंगे। इस तरह द्वार बंद देखकर मुझे बहुत दुख हुआ।’’

जमीनी स्तर पर भ्रम की स्थिति के बावजूद वहां जुटी भीड़ अपने राजनीतिक चयन को लेकर अडिग रही। कई समर्थकों ने उन पर विश्वास करने का एक अहम कारण यह बताया कि विजय ने पार्टी गतिविधियों के लिए स्वतंत्र रूप से धन जुटाने का फैसला किया।

भावुक गुणसुंदरी ने कहा, ‘‘उन्होंने अपने झंडे या मंच के लिए लोगों से एक रुपया भी नहीं लिया। उन्होंने सब कुछ खुद किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भले ही लोग उन्हें बदनाम करने या बाधाएं पैदा करने की कोशिश करें, अंततः वही जीतेंगे।’’

कई लोगों ने कहा कि वे समाचार रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर किए गए दावों के आधार पर बृहस्पतिवार सुबह जल्दी वहां पहुंचे थे। कुछ समर्थकों ने बताया कि वे सार्वजनिक परिवहन से आए और यह सोचकर घंटों इंतजार करते रहे कि कोई आधिकारिक घोषणा या कार्यक्रम जल्द होने वाला है।

गुणसुंदरी ने कहा, ‘‘मेरे बेटे ने मुझे बताया था कि कल घोषणाएं की गई थीं और आज सभी लोग आ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उसे यह भी नहीं बताया कि मैं निकल रही हूं। मैं उन्हें पहली बार बस सामने से देखने के लिए यात्रा पर निकल पड़ी।’’

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा