तमिलनाडु हिंदी थोपे जाने को कभी स्वीकार नहीं करेगा : उदयनिधि स्टालिन

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तमिलनाडु हिंदी थोपे जाने को कभी स्वीकार नहीं करेगा : उदयनिधि स्टालिन

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  • Publish Date - April 6, 2026 / 12:19 PM IST,
    Updated On - April 6, 2026 / 12:19 PM IST

तंजावुर (तमिलनाडु), छह अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को भाषा विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की आलोचना पर तीखा हमला बोला और कहा कि यह राज्य कभी तीन-भाषा फार्मूले को स्वीकार नहीं करेगा, बल्कि तमिल और अंग्रेजी की द्विभाषी नीति का ही पालन करेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू करने के लिए दबाव बना रही है, जिससे राज्य पर हिंदी थोपने का रास्ता साफ होगा। उन्होंने कहा कि एनईपी को स्वीकार करने का मतलब होगा कि केंद्र को तमिलनाडु पर हिंदी थोपने की अनुमति देना।

उदयनिधि ने तंजावुर जिले के थिरुवैयारु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) उम्मीदवार दुरई चंद्रशेखरन के लिए प्रचार करते हुए कहा, ‘‘हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। हम हमेशा तमिल और अंग्रेजी की दो-भाषा नीति का ही पालन करेंगे।’’

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता से अपील की कि वे चंद्रशेखरन को थिरुवैयारु से छठी बार भारी मतों से विजयी बनाएं। उन्होंने उत्साही भीड़ से कहा, ‘‘मैं वादा करता हूं कि अगर आप उन्हें 23 अप्रैल के चुनाव में 50,000 वोटों के भारी अंतर से जिताते हैं, तो मैं मुख्यमंत्री स्टालिन से बात कर उन्हें राज्य मंत्री बनाने की कोशिश करूंगा।’’

इसके साथ ही द्रमुक की युवा इकाई के सचिव ने आश्वासन दिया कि अगर चंद्रशेखरन जीतते हैं, तो वे हर महीने तंजावुर आएंगे और लोगों से मिलेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने 2021 के चुनाव में तंजावुर जिले की आठ में से सात विधानसभा सीटें जीती थीं। इस बार हमें शत-प्रतिशत जीत सुनिश्चित करनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की तरह मैं भी कावेरी डेल्टा का व्यक्ति हूं। इसलिए अगर आप इस जिले से आठ विधायक चुनकर भेजते हैं, तो मैं हर महीने तंजावुर आऊंगा।’’

उदयनिधि ने अन्ना द्रमुक महासचिव ई. के. पलानीस्वामी द्वारा उन्हें ‘‘अनुभवहीन’’ बताए जाने पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास पलानीस्वामी जैसा ‘‘नेताओं के पैरों में गिरकर खुद को बनाए रखने’’ का अनुभव नहीं है।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा